
इंदौर। पहले इंदौर में 6 किलोमीटर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो का व्यावसायिक संचालन शुरू किया गया और उसके बाद कुछ समय बाद भोपाल में भी मेट्रो शुरू की गई, मगर दोनों ही शहरों में शुरू किए गए रुटों पर यात्रियों का टोटा है। अब तक 6 करोड़ रुपए से अधिक की राशि बिजली-स्टाफ सहित अन्य खर्च के रूप में मेट्रो कॉर्पोरेशन फूंक चुका है और रोजाना 10 हजार रुपए की भी टिकटें भी नहीं बिक रही है। इंदौर में 17 किलोमीटर के ट्रैक पर अगले कुछ महीनों में मेट्रो दौड़ाने की भी तैयारी है। हालांकि इस रुट पर भी यात्रियों का टोटा रहेगा।
एक तरफ इंदौर-भोपाल मेट्रो की लागत बढ़ गई। दूसरी तरफ एलिवेटेड और अंडरग्राउंड रुट को लेकर लगातार चलती रही अनिर्णय की स्थिति के कारण भी काम समय पर पूरे नहीं हुए। अभी भी अंडरग्राउंड रुट बदलने का प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में नहीं रखा गया है। सिर्फ रोबोट से लेकर खजराना होते हुए एमजी रोड तक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने वाली ठेकेदार कम्पनी को निर्देश दिए हैं कि वह खजराना चौराहा तक का काम भी पूरा करे और उसके बाद एलिवेटेड का काम ना किया जाए। दरअसल खजराना चौराहा के बाद से ही अब मेट्रो को अंडरग्राउंड करने का निर्णय लिया गया है, जिस पर शासन ने भी अपनी सहमति तो जताई, लेकिन इसे लेकर आगे की प्रक्रिया फिलहाल ठप पड़ी है।
मेट्रो कॉर्पोरेशन नए सिरे से सर्वे करवा रहा है, ताकि जो क्षेत्र अंडरग्राउंड रूट के लिए बढ़ा है उसकी अनुमानित लागत पता की जा सके। 32 किलोमीटर का इंदौर-मेट्रो का पहला चरण है, जो एयरपोर्ट से गांधी नगर, सुपर कॉरिडोर, एमआर-10, विजय नगर, रेडिसन, रोबोट चौराहा से लेकर खजराना तक निर्मित किया जा रहा है और उसके आगे अंडरग्राउंड रुट लगभग 12 किलोमीटर का रहेगा, जो कि खजराना चौराहा से शुरू होकर पलासिया, एमजी रोड, रीगल, राजवाड़ा, बड़ा गणपति होते हुए एयरपोर्ट तक पहुंचेगा। कुछ समय पूर्व 6 किलोमीटर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो का संचालन शुरू किया। शुरुआत में मुफ्त यात्रा के चलते तो बड़ी संख्या में शहरवासियों ने मेट्रो ट्रेन का लुत्फ उठाया, मगर टिकट शुरू होने के बाद संख्या लगातार घटती रही।
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