
इंदौर। जम्मू -कश्मीर, गुजरात मे सफल होने के बाद अब इंदौर वन विभाग भी फॉरेस्ट मैनेजमेंट अथवा वन प्रबंधन के अलावा इको सिस्टम निगरानी के लिए हाइटेक ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगा । इस सम्बन्ध में कल नवरतन बाग स्थित वन विभाग मुख्यालय पर आयोजित कार्यशाला में प्रजेंटेशन दिया गया।

कार्यशाला में बताया गया कि दुर्गम पहाड़ियों पर बीज बोने , विशेष दुर्लभ प्रजाति के प्लान्टेशन पर नजर रखने, लेजर बीम से जंगल मे लगे पेड़-पौधों की दूरी नापने और उसकी वर्तमान स्थिति जानने के लिए लेजर बीम वाले लिडार और एचडी कैमरों से लैस अथवा अटैच हाइटेक ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक का इस्तेमाल देश प्रदेश के कई इलाकों में सफल रहा है।
जंगल प्रबन्धन के साथ ड्रोन से ईको सिस्टम स्टडी भी सम्भव
इस ड्रोन तकनीक से वन प्रबन्धन के अलावा पर्यावरण सम्बन्धित इको सिस्टम सहित मौसमी, भौगोलिक और जलवायु परिवर्तन की जानकारी जुटा कर उसका विश्लेषण और अध्ययन मतलब स्टडी की जा सकती है। पहाड़ी पर बीज डालने के बाद उसके अंकुरित होने से ,पोधे पेड़ बनने तक या जमीन पर किये गए प्लाटेंशन पर नजर रखी जा सकती है। डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कल यह कार्यशाला में मुख्य वन संरक्षक पी एन मिश्रा के मार्गदर्शन में हुई इसकी अध्यक्षता पद्यप्रिया बाल कृष्णन,ने की । इस दौरान ड्रोन तकनीक विशेषज्ञ प्राइम यूएवी टीम के भीष्म औऱ पर्यावरण विशेषज्ञ समरजीत यादव सहित फारेस्ट सम्बन्धित एनजीओ सभी एसडीओ फारेस्ट रेंजर, डिप्टी रेंजर वन रक्षक मौजूद थे।
पायलट प्रोजेक्ट के लिए शंकरगढ़ पहाड़ी का चयन
डीएफओ के अनुसार कार्यशाला में हाइटेक ड्रोन तकनीक का प्रजेंटेशन देने के बाद ड्रोन सम्बन्धित पायलट प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग ने देवास शंकर गढ़ पहाड़ी का चयन किया है । यहां पर ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल इकोलॉजिकल मैपिंग, लिडार से फोटोग्राफमेट्रिक डेटा की मदद से सॉइल और मॉइस्चर कंजर्वेशन सहित दुर्लभ वन्य प्रजातियों के लिए किया जायेगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved