
नई दिल्ली । सूर्य ग्रहण(Solar eclipse) भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसका प्रभाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र (Astrology)के अनुसार यह ग्रहण अग्नि पंचक (Fire pentacle)के दौरान लगा, जिससे इसके दुष्प्रभाव (side effects) और भी बढ़ गए हैं। पंचक के पांचों दिन सामान्य रूप से शुभ कार्यों (auspicious works) के लिए वर्जित माने जाते हैं, लेकिन जब यह अग्नि पंचक हो तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। मान्यता है कि इस दौरान आगजनी, दुर्घटनाएं, राजनीतिक उथल-पुथल और अनचाही घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में ग्रहण के बाद के ये चार दिन विशेष सतर्कता की मांग कर रहे हैं।
अग्नि पंचक में ज्वलनशील वस्तुओं की खरीदारी से विशेष रूप से बचने की सलाह दी जाती है। गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल, लकड़ी या अन्य ईंधन जैसी चीजें खरीदना अशुभ माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस समय लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इतना ही नहीं, यात्रा को भी टालने की सलाह दी गई है, खासकर दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने को कहा गया है। माना जाता है कि ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है और अग्नि पंचक में यह असर और तीव्र हो सकता है। ऐसे में कोई भी शुभ कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं देता और उल्टा नुकसान भी हो सकता है।
इस बार सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगा। उस समय कुंभ राशि में सूर्य, बुध, मंगल और राहु का चतुर्ग्रही योग बना हुआ था, जिसका प्रभाव अग्नि पंचक के दौरान भी जारी है। यही कारण है कि कुछ राशियों के लिए यह समय अधिक चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। विशेष रूप से मेष, सिंह और वृश्चिक राशि के जातकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं, जिन्हें अग्नि तत्व का ग्रह माना जाता है। ऐसे में इन राशि के लोगों के स्वभाव में इस दौरान आक्रामकता बढ़ सकती है। गुस्से में लिया गया कोई भी निर्णय नुकसानदेह साबित हो सकता है। इन्हें अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने और विवादों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। वहीं सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं, जो इस समय राहु के प्रभाव में हैं। ऐसे में सिंह राशि के जातकों को वरिष्ठ अधिकारियों से टकराव से बचना चाहिए। कार्यस्थल पर तनाव बढ़ सकता है और छोटी बात बड़ा विवाद बन सकती है। निवेश के फैसले टालना और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, ग्रहण के बाद के ये चार दिन संयम, सतर्कता और धैर्य से बिताने की सलाह दी जा रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं पर विश्वास करने वाले लोगों के लिए यह समय सावधानी और आत्मनियंत्रण का है, ताकि संभावित नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सके।
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