
नई दिल्ली । यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (UN Secretary-General Antonio Guterres) ने कहा कि एआई को मानव क्षमता का स्थान न लेकर उसका पूरक बनना चाहिए (AI should Complement not replace Human Capabilities) । संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इंडिया एआई-इम्पैक्ट समिट में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौतियों के बारे में चेतावनी दी।
एआई के खतरे को लेकर उन्होंने कहा, “हमें श्रमिकों में निवेश करना चाहिए, ताकि एआई इंसानी क्षमता को बढ़ाए, उसे रिप्लेस न करे।” नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के उद्घाटन पर उन्होंने एआई के विस्तार से आने वाली सामाजिक, आर्थिक और इकोलॉजिकल समस्याओं से निपटने की अपील की। उन्होंने कहा, “असली इम्पैक्ट का मतलब है ऐसी तकनीक जो जिंदगी को बेहतर बनाए और धरती की रक्षा करे। आइए डिफॉल्ट सेटिंग के तौर पर गरिमा के साथ सबके लिए एआई बनाएं।”
ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण पर असर के बारे में उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे एआई की एनर्जी और पानी की डिमांड बढ़ रही है, डाटा सेंटर्स और सप्लाई चेन को क्लीन पावर पर स्विच करना चाहिए न कि कमजोर समुदाय पर खर्च कर देना चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि “एआई सभी के लिए सुरक्षित होना चाहिए।” इसके लिए लोगों को शोषण, हेरफेर और दुरुपयोग से बचाना जरूरी है।बच्चों पर सोशल मीडिया के बुरे असर को लेकर जारी विवाद के बीच एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, “किसी भी बच्चे को अनियंत्रित एआई का परीक्षण विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।” गुटेरेस ने कहा, “एआई सभी का होना चाहिए। बिना निवेश के कई देश एआई के दौर से बाहर हो जाएंगे।” उन्होंने एआई पर एक ग्लोबल फंड की अपनी मांग दोहराई और कहा, “हर जगह बेसिक कैपेसिटी बनाने के लिए स्किल्स, डाटा, सस्ती कंप्यूटिंग पावर और सबको साथ लेकर चलने वाले इकोसिस्टम।”
उन्होंने एआई ग्लोबल फंडिंग के लिए इस बार 3 बिलियन डॉलर का लक्ष्य तय किया है और कहा कि 3 बिलियन डॉलर किसी एक टेक कंपनी के सालाना रेवेन्यू के एक फीसदी से भी कम है। उन्होंने कहा कि यह एआई विस्तार की एक छोटी सी कीमत है जिससे सभी को फायदा होता है, जिसमें एआई बनाने वाले बिजनेस भी शामिल हैं। सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट (जो सालाना रेवेन्यू में टेक कंपनियों में चौथे नंबर पर है) हर साल 305 बिलियन डॉलर कमाती है। गुटेरेस ने कहा कि हालांकि एआई असमानता को गहरा कर सकता है, पूर्वाग्रह को बढ़ा सकता है और नुकसान को बढ़ावा दे सकता है, लेकिन अगर सही तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए तो इसमें मानवता को बेहतर बनाने की अपार क्षमता है।

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