
नई दिल्ली। एयर इंडिया (Air India) की उड़ान एयर इंडिया-171 (Air India-171) दुर्घटना के पीड़ित परिवारों के वकील चक एन. चियोनुमा (Attorney Chuck N. Chiyonuma) ने परिवारों को एयरलाइन (Airline) द्वारा पेश किए गए समझौते पर हस्ताक्षर न करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अभी सभी एआईपी डेटा और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए ताकि हादसे की वास्तविक जिम्मेदारी तय हो सके और उचित मुआवजा निर्धारित किया जा सके। वकील ने आगाह किया कि एयरलाइन का प्रस्ताव न केवल एयर इंडिया बल्कि विमान निर्माता और सरकारी संस्थाओं को भविष्य की सभी कानूनी देनदारियों से मुक्त कर देता है, इसलिए बिना पूरी जानकारी के साइन करना नुकसानदेह हो सकता है।
समझौते पर साइन न करने की सलाह
एयर इंडिया फ्लाइट एआई-१७१ हादसे में १०५ से अधिक पीड़ितों के परिवारों की तरफ से चक एन. चियोनुमा ने कहा कि वर्तमान में समझौते पर साइन करना उचित नहीं होगा। उन्होंने बताया कि एआईपी डेटा और जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही दोषियों की पहचान हो पाएगी और वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सकेगा। ऐसे में पहले दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना परिवारों के अधिकारों को कमजोर कर सकता है।
वजह क्या बताई
वकील ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समझौता सभी अधिकार क्षेत्रों में लागू होता है और इसमें एयर इंडिया के साथ-साथ अन्य कंपनियों को भी भविष्य में कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि कुछ परिवारों को पहले ही समझौते की शर्तें भेजी गई हैं, लेकिन उन्हें इसे स्वीकार न करने की सलाह दी गई है। इससे पहले जांच पूरी होने के बिना समझौते पर हस्ताक्षर करना खतरनाक साबित हो सकता है।
चक एन. चियोनुमा ने बताया कि इस समझौते में कई समस्याएँ हैं। यह न केवल एयर इंडिया को मौजूदा और भविष्य की देनदारियों से मुक्त करता है बल्कि दुनिया भर के अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं को भी संभावित कानूनी दावों से बाहर रखता है। इसलिए उन्होंने परिवारों से कहा कि बिना पूरी जानकारी और रिपोर्ट के अपने कानूनी अधिकारों को त्यागना हानिकारक हो सकता है।
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