
इन्दौर। मात्र 9 महीने में ही कांग्रेस ने प्रदेश प्रवक्ताओं की टीम भंग कर दी है। जाहिर तौर पर प्रदेश कांग्रेस संगठन इस मामले में बोलने से बच रहा है, लेकिन कहा जा रहा है कि नेताओं द्वारा मनमर्जी ने अपने समर्थकों को प्रवक्ता बना दिया गया था, जिनमें से अधिकांश काम नहीं कर रहे थे। अब एक बार फिर नए सिरे से इंटरव्यू के आधार पर प्रवक्ताओं की नियुक्ति होगी। तब तक प्रदेश कांग्रेस ही इन्हें डिबेट या अन्य स्थानों पर भेजेगी। मनचाही बयानबाजी पर भी रोक लगा दी गई है।
पिछले साल 5 मई को मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश नायक ने प्रदेश में प्रवक्ताओं की नियुक्ति की थी। पहली बार में कुल 53 प्रवक्ता बनाए गए थे। बाद में इन्हें जिलों की जवाबदारी भी दी गई, ताकि स्थानीय मुद्दों और स्थानीय अध्यक्ष के साथ तालमेल बिठाकर बयान जारी किए जाए, लेकिन इनमें से अधिकांश प्रवक्ता 9 महीने से निष्क्रिय हंै।
इंदौर में एक दो नाम छोड़ दिए जाए तो बाकी प्रवक्ता भी निष्क्रिय नजर आते हैं। इसको लेकर प्रदेश अध्यक्ष जीतेू पटवारी ने कल प्रदेश प्रवक्ताओं की नियुक्ति रद्द कर दी है। अब प्रदेश में कोई प्रवक्ता नहीं बचा है। जाहिर तौर पर इसका प्रमुख कारण नहीं बताया जा रहा है, लेकिन प्रवक्ताओं के कार्यों के आकलन के आधार पर फिलहाल सभी की छुट्टी प्रवक्ता पद से कर दी गई है। अब कहा जा रहा है कि इंटरव्यू के आधार पर इनकी नियुक्ति की जाएगी, जिसकी घोषणा एकसाथ होगी। तब तक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय द्वारा किसी भी प्रवक्ता को डिबेट में जाने की मनाही है।
कांग्रेस संगठन ही तय करेगा कि किस प्रवक्ता को किस विषय पर बोलने के लिए भेजा जाए। इससे माना जा रहा है कि कांगे्रस अब मजबूती से मीडिया के सामने अपना पक्ष रखने के लिए प्रवक्ताओं को तैयार करेगी न कि पद लेकर घर बैठने वाले नेताओं को मौका देगी। टेलेन्ट हंट कार्यक्रम के माध्यम से नए कार्यकर्ताओं को नियुक्ति मिले, इसको लेकर एक समिति बनाई है। समिति के सदस्यों की घोषणा एक-दो दिन में हो जाएगी। समिति पुराने प्रवक्ताओं का आकलन करेगी और नए लोगों को भी मौका देगी। -जीतू पटवारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
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