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अंबानी की रिलायंस को अमेरिका से बड़ी राहत, वेनेजुएला के कच्चे तेल की सीधी खरीद का लाइसेंस

February 14, 2026

नई दिल्ली। मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) को अमेरिका से वेनेजुएला के कच्चे तेल (Crude oil) की सीधी खरीद की अनुमति मिल गई है। इस लाइसेंस के साथ कंपनी रियायती दर पर उपलब्ध भारी कच्चा तेल आयात कर सकेगी, जिससे उसकी रिफाइनिंग लागत और मार्जिन पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।

प्रतिबंधों के कारण रुका था आयात
वेनेजुएला पर 2019–20 में लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारतीय कंपनियों की सीधी खरीद रुक गई थी। उससे पहले रिलायंस वेनेजुएला के तेल की नियमित खरीदार रही थी। प्रतिबंधों के चलते तेल की आपूर्ति केवल मध्यस्थ कारोबारियों के जरिए ही संभव थी, जिससे लागत और लॉजिस्टिक्स जटिल हो गए थे।



  • जामनगर रिफाइनरी के लिए क्यों अहम है यह तेल?
    गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस का रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग परिसरों में गिना जाता है। यह संयंत्र विशेष रूप से भारी और बहुत-भारी ग्रेड के कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए डिजाइन किया गया है।
    वेनेजुएला का ओरिनोको बेल्ट क्षेत्र इसी तरह के भारी क्रूड के लिए जाना जाता है, जो तकनीकी रूप से इस रिफाइनरी के लिए उपयुक्त माना जाता है।

    अमेरिका ने दी सीमित अनुमति

    सूत्रों के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका ने जनवरी के अंत में कुछ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को वेनेजुएला से सीधे तेल खरीदने की सामान्य अनुमति दी।
    इससे पहले प्रतिबंधों के कारण कंपनियां केवल ट्रेडिंग फर्मों के माध्यम से ही खरीद कर रही थीं।

    पहले भी खरीद चुकी है रिलायंस

    2024 में मिली अस्थायी राहत के दौरान रिलायंस ने वेनेजुएला से तेल का आयात किया था। हाल में कारोबारियों के जरिए सप्लाई शुरू होने पर कंपनी ने वैश्विक ट्रेडिंग फर्म विटॉल से लगभग 20 लाख बैरल तेल खरीदा था।
    इस छूट का लाभ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियों ने भी उठाया।

    आगे क्या असर पड़ सकता है?
    भारी क्रूड सस्ता मिलने से रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर हो सकते हैं।
    सप्लाई स्रोतों में विविधता से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
    वैश्विक तेल व्यापार में भारत की सौदेबाजी क्षमता बढ़ सकती है।

    भारत की ऊर्जा रणनीति में बदलाव का संकेत

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति का हिस्सा है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।
    हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया था कि भारत वैकल्पिक स्रोतों से तेल आयात बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

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