तेहरान। अमेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिका ने सीरिया (Syria) में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अमेरिकी सैनिकों और सैन्य उपकरणों को वहां से हटाकर (Iraq) भेजा जा रहा है। इस कदम को क्षेत्र में बदलती रणनीतिक तैनाती के रूप में देखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना ने सीरिया के कस्त्रक क्षेत्र स्थित अपने अहम सैन्य अड्डे से सैनिकों और उपकरणों की निकासी शुरू कर दी है। यह कार्रवाई पहले घोषित सैनिक कटौती योजना का हिस्सा है। इस संबंध में अमेरिकी सेंट्रल कमांड United States Central Command (सेंटकॉम) ने पहले ही संकेत दिया था कि सीरिया में सैनिकों की संख्या घटाई जाएगी।
इराक की ओर बढ़ रहे काफिले
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य काफिले लगातार उपकरणों के साथ इराकी सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि निकासी रविवार से शुरू हुई और सोमवार तक सैनिक उत्तरी इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्द क्षेत्र में प्रवेश कर चुके थे।
बेस से एयर डिफेंस सिस्टम, जैमिंग उपकरण और इंजीनियरिंग संसाधनों को भी हटाया जा रहा है।
कुर्द बलों की चुप्पी
इस क्षेत्र की सुरक्षा संभालने वाली Syrian Democratic Forces (SDF) ने इस घटनाक्रम पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
कैदियों को भी किया जा रहा स्थानांतरित
अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़े डिटेंशन सेंटरों में बंद लगभग 5,700 कैदियों को भी इराक की जेलों में भेजा जा रहा है, जहां उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चलाई जाएगी।
इससे पहले अमेरिका जॉर्डन सीमा के पास स्थित एक अन्य बेस भी खाली कर चुका है, जो Jordan के निकट था।
क्षेत्र में बढ़ रही सैन्य गतिविधि
जहां एक ओर सीरिया से सैनिक घटाए जा रहे हैं, वहीं रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका ने ईरान के नजदीकी इलाकों में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई है। विश्लेषकों का कहना है कि यह “रीडिप्लॉयमेंट” यानी रणनीतिक पुनर्संतुलन का हिस्सा है, न कि पूरी तरह वापसी।
नेताओं के बयान से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) लगातार ईरान पर दबाव बनाने वाले बयान दे रहे हैं और जल्द समझौते की चेतावनी दे चुके हैं। वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई Ali Khamenei ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी भी हमले का ऐसा जवाब दिया जाएगा जिसे “पीढ़ियां याद रखेंगी।”
सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की निकासी को पूरी तरह वापसी नहीं, बल्कि ईरान से बढ़ते तनाव के बीच सैन्य रणनीति के पुनर्गठन के तौर पर देखा जा रहा है। मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन को लेकर आने वाले समय में स्थिति और संवेदनशील हो सकती है।
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