munirवाशिंगटन। पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत (Balochistan Province) लंबे समय से अपने विशाल प्राकृतिक संसाधनों (Vast Natural Resources) के लिए जाना जाता है। बंजर दिखने वाली इस ज़मीन के नीचे सोना, तांबा (Gold, Copper) और दुर्लभ खनिजों का अथाह भंडार छिपा है। अब इन्हीं संसाधनों पर अमेरिका की नजर टिक गई है। अमेरिका ने बलूचिस्तान (Balochistan) स्थित दुनिया की सबसे बड़ी सोना-तांबा खदानों में से एक रेको डीक माइन में 1.3 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है।
यह निवेश अमेरिका के नए रणनीतिक कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के तहत किया जा रहा है, जिसे हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लॉन्च किया है। इस परियोजना का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई चेन को नया स्वरूप देना है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, प्रोजेक्ट वॉल्ट का मकसद चीन के वर्चस्व को चुनौती देना है। फिलहाल रेयर अर्थ मिनरल्स के वैश्विक बाजार पर चीन का दबदबा माना जाता है। अमेरिका अब इस निर्भरता को कम करना चाहता है और वैकल्पिक स्रोतों में भारी निवेश कर रहा है। रेको डीक में किया गया निवेश इस रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
कहां स्थित है रेको डीक?
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेको डीक पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के चागई जिले में स्थित है। यह इलाका अफगानिस्तान सीमा के पास ज्वालामुखीय पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। अमेरिकी विदेश विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रेको डीक प्रोजेक्ट वॉल्ट के तहत अमेरिका का इकलौता विदेशी निवेश है।
प्रोजेक्ट वॉल्ट की घोषणा 2 फरवरी 2026 को की गई थी। यह पहल यूनाइटेड स्टेट्स एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) के नेतृत्व में चलाई जा रही है।
रेको डीक में कितना बड़ा खजाना?
आकलनों के मुताबिक, रेको डीक क्षेत्र में करीब 5.9 अरब टन अयस्क मौजूद है, जिसमें लगभग 0.41 प्रतिशत तांबा और 41.5 मिलियन औंस सोना होने का अनुमान है। इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड-कॉपर डिपॉजिट्स में गिना जाता है।
क्या है प्रोजेक्ट वॉल्ट?
प्रोजेक्ट वॉल्ट को अमेरिका की ‘स्ट्रैटेजिक क्रिटिकल मिनरल्स रिजर्व’ योजना के रूप में देखा जा रहा है। इसका लक्ष्य रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहनों, आधुनिक तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
EXIM बैंक ने इस पहल के लिए करीब 10 अरब डॉलर का कर्ज मंजूर किया है। कुल मिलाकर यह 12 अरब डॉलर का प्रोजेक्ट है, जिसका अधिकांश निवेश अमेरिका के भीतर खनन और प्रोसेसिंग परियोजनाओं में होगा—रेको डीक इसका एकमात्र अपवाद है।
पुराने विवाद और सुरक्षा चुनौतियां
रेको डीक परियोजना पहले भी विवादों में रही है। वर्ष 2011 में पाकिस्तान सरकार ने चिली की एंटोफागास्टा और कनाडा की बैरिक गोल्ड कंपनी की साझेदारी वाली कंपनी टेथियन कॉपर को खनन अधिकार देने से इनकार कर दिया था। मामला अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता तक पहुंचा।
अब बैरिक गोल्ड एक बार फिर इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई है, हालांकि हाल के वर्षों में बलूचिस्तान में सुरक्षा हालात को देखते हुए कंपनी ने परियोजना की समीक्षा भी शुरू की है। इसके बावजूद अमेरिका का घोषित निवेश आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
क्यों अहम है बलूचिस्तान अमेरिका के लिए?
अमेरिका को तांबा, सोना और रेयर अर्थ मिनरल्स की भारी जरूरत है, जिनका इस्तेमाल रक्षा उद्योग, इलेक्ट्रिक कारों और हाई-टेक सेक्टर में होता है। चीन की मजबूत पकड़ को कमजोर करने के लिए अमेरिका अब सीधे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों में निवेश कर रहा है। सुरक्षा चुनौतियों और राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद बलूचिस्तान में लगाया गया यह दांव अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है।
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