
नई दिल्ली । ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका (America) को दोहरे आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर युद्ध पर लगातार बढ़ता खर्च है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय ऋण (National debt) ऐतिहासिक स्तर(Historical Level) पर पहुंच गया है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रीय ऋण 39 ट्रिलियन डॉलर (National Debt: $39 Trillion) के रिकॉर्ड स्तर को पार कर चुका है, जो देश की आर्थिक सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान (Iran) के साथ तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं और सैन्य गतिविधियों पर भारी खर्च किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध, कर कटौती, महामारी के दौरान किए गए बड़े सरकारी खर्च और रक्षा बजट में वृद्धि ने मिलकर इस ऋण को तेजी से बढ़ाया है। व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट के अनुसार, ईरान में चल रहे सैन्य अभियान पर अब तक 12 अरब डॉलर से अधिक खर्च किया जा चुका है, और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह संघर्ष कब तक जारी रहेगा और इसका अंतिम आर्थिक असर कितना गहरा होगा।
बढ़ते कर्ज़ का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकारी जवाबदेही कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च राष्ट्रीय ऋण के कारण ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे घर, कार और अन्य जरूरी चीजों के लिए लोन लेना महंगा हो जाएगा। इसके अलावा, जब सरकार अधिक उधार लेती है, तो निजी क्षेत्र के लिए निवेश की संभावनाएं घट जाती हैं, जिसका असर रोजगार और वेतन वृद्धि पर भी पड़ सकता है। परिणामस्वरूप, आम लोगों के लिए जीवन यापन की लागत और अधिक बढ़ सकती है।
पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन के अध्यक्ष माइकल पीटरसन ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि जिस रफ्तार से राष्ट्रीय ऋण बढ़ रहा है, वह आने वाली पीढ़ियों पर भारी वित्तीय बोझ डाल सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही रफ्तार जारी रही, तो आगामी चुनावों से पहले ही यह आंकड़ा 40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। उनके अनुसार, बिना ठोस योजना के इस तरह उधारी बढ़ाना आर्थिक अस्थिरता की ओर इशारा करता है।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका में राष्ट्रीय ऋण का बढ़ना किसी एक सरकार या पार्टी तक सीमित नहीं है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों ही प्रशासन के दौरान यह लगातार बढ़ता रहा है। हाल के वर्षों में युद्ध, महामारी राहत पैकेज और टैक्स कटौती जैसे फैसलों ने इस वृद्धि को और तेज किया है। आंकड़े बताते हैं कि कुछ ही महीनों में ऋण 37 ट्रिलियन से बढ़कर 39 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो इसकी तेज रफ्तार को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, ईरान के साथ चल रहे संघर्ष और बढ़ते राष्ट्रीय ऋण ने अमेरिका के सामने एक जटिल आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले समय में सरकार को संतुलन बनाते हुए रक्षा जरूरतों और आर्थिक स्थिरता के बीच कठिन फैसले लेने होंगे, ताकि आम नागरिकों पर इसका नकारात्मक असर कम किया जा सके।
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