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फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों और गिरफ्तारियों के बीच ट्रंप ने मैक्रों से की बड़ी अपील, सीमाओं को लेकर क्या कहा?

October 19, 2026

नई दिल्ली । फ्रांस (France) में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी सेवाओं की स्थिति को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन 17 और 18 अक्टूबर को हिंसक (Violent) घटनाओं में बदल गए। कई शहरों में तोड़फोड़, दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने फ्रांस की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) से देश की सीमाएं बंद करने और उन पर नियंत्रण (Control) मजबूत करने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि बाहर से आए लोगों के कारण फ्रांस (France) में हालात बिगड़े हैं।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि फ्रांस जल रहा है। उनके अनुसार, ऐसे लोग देश में आ रहे हैं जिनके मन में नफरत है और इससे फ्रांस जैसे महान देश को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने मैक्रों से आग्रह किया कि स्थिति हाथ से निकलने और बहुत देर होने से पहले सीमाओं को बंद करने तथा उन पर नियंत्रण करने के कदम उठाए जाएं। हालांकि, फ्रांस में प्रदर्शनकारियों की मांगों और हिंसा के पीछे के कारणों को लेकर अलग-अलग पहलू सामने आए हैं।

इससे पहले ट्रंप ने फ्रांस की क्रांति के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए मजाकिया टिप्पणी भी की थी। उन्होंने कहा था कि फ्रांस क्रांति के लिए प्रसिद्ध है और लोग वहां जाकर क्रांति में शामिल हो सकते हैं। हालिया हिंसा के बाद उनकी टिप्पणियों में सीमा नियंत्रण और देश में आने वाले लोगों की भूमिका पर जोर दिखाई दिया।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस में हुई घटनाओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पश्चिमी उदारवादी सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि दया और विविधता के नाम पर तीसरी दुनिया के लोगों को फ्रांस सहित पश्चिमी देशों में लाया गया, लेकिन उनके समाज में घुलने-मिलने और अनुकूलन से जुड़े सवालों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

वेंस ने दावा किया कि सरकारों को संभावित समस्याओं के बारे में पहले ही चेतावनी दी गई थी, लेकिन उन्होंने समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए। लिमोजेस शहर के ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने फ्रांस के लिए चिंता जताई। उन्होंने कहा कि फ्रांस सुंदर देश है और वहां के लोगों तथा ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं को रोका जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से भी फ्रांस में हो रही घटनाओं पर ध्यान देने की अपील की।

फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में लगभग 5 लाख 50 हजार लोग शामिल हुए। दूसरी ओर, सीजीटी श्रमिक संघ सहित प्रदर्शन आयोजित करने वाले समूहों ने इसमें करीब 8 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया। प्रदर्शनों में छात्र, श्रमिक संगठन और अन्य समूहों के लोग शामिल थे। उनकी प्रमुख शिकायतें महंगाई, शिक्षा से जुड़ी समस्याओं और सरकारी सेवाओं की खराब स्थिति को लेकर थीं।

शुरुआत में प्रदर्शन इन सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर असंतोष जताने के लिए किए गए थे, लेकिन बाद में कई स्थानों पर स्थिति बिगड़ गई। कुछ प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई। कई शहरों में दुकानों में लूटपाट और इमारतों में आग लगाने की घटनाएं हुईं। इन घटनाओं के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा।


  • उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हिंसा के बाद अधिकारियों ने करीब 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया। सैकड़ों पुलिसकर्मियों और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई। लिमोजेस शहर में स्थित 143 साल पुराने ऐतिहासिक सिटी हॉल का एक हिस्सा आग की चपेट में आ गया। इन घटनाओं के बाद फ्रांस में तनाव बना हुआ है। प्रदर्शन के दौरान उठाए गए सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ सार्वजनिक सुरक्षा और हिंसा को नियंत्रित करना भी प्रशासन के सामने प्रमुख चुनौती बन गया है।

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