वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International politics) में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अर्जेंटीना की एक संघीय अदालत ने अमेरिका से वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) को सौंपने की औपचारिक मांग की है। यह मांग उस समय की गई है, जब मादुरो पहले से ही अमेरिका की हिरासत में हैं और न्यूयॉर्क की जेल में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों का सामना कर रहे हैं।
अर्जेंटीना के संघीय न्यायाधीश सेबेस्टियन रामोस द्वारा जारी वारंट में मादुरो पर अपने शासनकाल के दौरान गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हिंसा, यातना और जबरन गायब किए जाने जैसी कार्रवाइयों को न केवल अनुमति दी, बल्कि उनकी निगरानी भी की।
यह मुकदमा उस अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांत पर आधारित है, जिसके तहत अर्जेंटीना की अदालतें दुनिया में कहीं भी हुए मानवता के खिलाफ अपराधों, नरसंहार और आतंकवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई कर सकती हैं। इस केस में वेनेजुएला के उन नागरिकों को वादी बनाया गया है, जिन्होंने सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के हाथों कथित तौर पर अमानवीय यातनाएं झेली हैं।
कैसे शुरू हुआ यह केस
इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत साल 2023 में ब्यूनस आयर्स में मानवाधिकार संगठनों की पहल पर हुई थी। अर्जेंटीना की न्यायिक व्यवस्था पहले भी अपनी सीमाओं से बाहर हुए मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए जानी जाती रही है, चाहे वह स्पेन में फ्रेंको शासन हो या म्यांमार में रोहिंग्या संकट।
3 जनवरी को अमेरिकी सेना के एक विशेष ऑपरेशन में मादुरो को सत्ता से हटाए जाने और गिरफ्तार किए जाने के बाद, अर्जेंटीना के सरकारी अभियोजकों ने न्यायाधीश रामोस से प्रत्यर्पण प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया था।
क्या अमेरिका मानेगा अर्जेंटीना की मांग?
हालांकि अर्जेंटीना ने 1997 की प्रत्यर्पण संधि का हवाला दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का इस पर तुरंत सहमत होना मुश्किल है। इसके पीछे कई अहम वजहें हैं।
अमेरिका में चल रहा मुकदमा: मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स फिलहाल ब्रुकलिन की जेल में बंद हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने करीब 25 वर्षों तक ड्रग कार्टेल के साथ मिलकर अमेरिका में हजारों टन कोकीन की तस्करी में मदद की।
राजनीतिक समीकरण: अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली, जिन्हें डोनाल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है, मादुरो की गिरफ्तारी का खुलकर समर्थन कर चुके हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने बताया ऐतिहासिक कदम
मानवाधिकार संगठनों ने इस प्रत्यर्पण मांग को ऐतिहासिक बताया है। ‘अर्जेंटीना फोरम फॉर द डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसी’ ने कहा कि यह उन वेनेजुएला के पीड़ितों के लिए बड़ी जीत है, जिन्होंने ताकतवर सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने का साहस किया।
अब अर्जेंटीना का विदेश मंत्रालय इस आधिकारिक अनुरोध को वाशिंगटन डीसी भेजेगा, जहां अमेरिकी न्याय विभाग इस पर अंतिम फैसला करेगा।
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