
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED ) कार्रवाई को लेकर राज्य से लेकर देशभर की राजनीति में गर्माहट तेज है। इसी बीच इस कार्रवाई को लेकर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने केंद्र सरकार (Central Government) पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चुनाव (Election) आते ही जांच एजेंसियों (Investigative Agencies) को अचानक दस्तावेजों की याद आ जाती है और इसका मकसद सिर्फ विपक्षी नेताओं को परेशान करना होता है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान सिब्बल ने पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई का मामला उठाया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जहां भाजपा चुनाव नहीं जीत सकती, वहां ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को परेशान करने के लिए ईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई भी जांच एजेंसी किसी दफ्तर में जाकर सभी फाइलें कैसे ले जा सकती है। अगर कोयला घोटाले की जांच करनी है तो उससे जुड़ी फाइलें लें, लेकिन हर फाइल ले जाना किस अधिकार में है? किसी भी जांच एजेंसी को ऐसा करने का हक नहीं है।
कपिल सिब्बल ने ईडी को एक सर्वव्यापी एजेंसी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य कानून लागू करना नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं को डराना और परेशान करना है। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते टकराव का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में राज्य और केंद्र के बीच जानबूझकर विवाद पैदा किया जा रहा है।
सिब्बल ने आगे कहा कि चुनाव के समय ही ऐसी कार्रवाइयां क्यों तेज हो जाती हैं। कोयला घोटाला कोई नया मामला नहीं है, यह कई वर्षों से चल रहा है। फिर अब ही अचानक कार्रवाई क्यों? राज्यसभा सांसद ने यूपीए सरकार के कार्यकाल (2004 से 2014) को याद करते हुए कहा कि उस समय इस तरह की खबरें अखबारों में नहीं आती थीं। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने ईडी को इतनी खुली छूट नहीं दी थी। उस दौर में किसी भी राजनीतिक पार्टी या नेता के खिलाफ झूठी जानकारी के आधार पर कार्रवाई नहीं की गई।
सिब्बल ने आरोप लगाते हुए कहा कि आज ईडी एक ऐसी एजेंसी बन गई है जो देश में कहीं भी, कभी भी पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि जब भी कहीं कोई एफआईआर दर्ज होती है, ईडी वहां पहुंच जाती है और खासतौर पर चुनाव के समय उसकी सक्रियता बढ़ जाती है। इससे देश की संघीय व्यवस्था (फेडरल स्ट्रक्चर) को नुकसान पहुंच रहा है।
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