
एसएआर खत्म होते ही शिक्षकों का नया हेडेक…2026 से फरवरी 2027 तक व्यस्त रहेंगे … 13 अप्रैल से ट्रेनिंग… आज से मकानों में नंबरिंग के आदेश जारी होंगे
इन्दौर। जनगणना-2027 (Census-2027) की तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है । 13 अप्रैल से लगभग 8000 शिक्षकों (8,000 teachers) की प्रगणक की ट्रेनिंग (Training) शरू हो जाएगी।करीब 15 साल बाद होने जा रही इस जनगणना को इस बार पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल स्वरूप में अंजाम दिया जाएगा। केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद मध्यप्रदेश में भी प्रशासनिक स्तर पर कवायद भी शुरू हो चुकी है। लेकिन इसका सीधा असर एक बार फिर स्कूलों में पढ़ाई की नियमितता पर पडऩे की आशंका जताई जा रही है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर ही पड़ेगा।
मकानों की नंबरिंग के आदेश
प्रशासनिक कार्यक्रम के अनुसार अप्रैल 2026 से मास्टर ट्रेनर्स, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण शुरू होगा। इसके बाद 1 से 30 मई 2026 तक मकानों की गणना की जाएगी। इस चरण में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मकानों की नंबरिंग कर गणना ब्लॉक बनाए जाएंगे। जिसके लिए आज से ही आदेश जारी किए जाएंगे ।इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा, जब 1 से 28 फरवरी तक आबादी की गणना कराई जाएगी। जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 तय की गई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इससे पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य ने बच्चों की पढ़ाई को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। कई महीनों तक शिक्षक स्कूल से बाहर रहे, जिसका सीधा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ा। अब जनगणना की यह लंबी प्रक्रिया 2026 से लेकर फरवरी 2027 तक चलेगी, जिससे हालात एक बार फिर वैसे ही बनने की आशंका है।हालांकि जनगणना राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और इसे तय समय-सीमा में पूरा करना अनिवार्य है।
10 नगरीय निकाय, 621 गांव
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार इंदौर जिले में जनगणना-2027 के लिए कुल 10 तहसील, 10 नगरीय निकाय और 621 ग्राम शामिल किए गए हैं। इन्हीं इकाइयों के आधार पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गणना ब्लॉक बनाए जाएंगे। इसके लिए सबसे पहले मकानों की नंबरिंग का कार्य किया जाएगा, जिससे प्रगणकों को तय सीमा में गणना करने में आसानी हो। प्रशासन की योजना के अनुसार जनगणना दो चरणों में होगी। पहले चरण में 1 से 30 मई 2026 तक मकानों की गणना की जाएगी, जबकि दूसरे चरण में 1 से 28 फरवरी 2027 तक आबादी की गणना होगी।
मकान गणना में कुल 37 सवाल पूछे जाएंगे
गौरतलब है कि वर्ष 2011 की जनगणना में इंदौर जिले की जनसंख्या 32 लाख 76 हजार 697 दर्ज की गई थी। अब अनुमान है कि जिले की आबादी 50 लाख के पार पहुंच सकती है। सुपर कॉरिडोर, बायपास और प्रमुख मार्गों के आसपास तेजी से हुए शहरी विस्तार को देखते हुए मकानों की संख्या भी 10 लाख से अधिक होने की संभावना है। अच्छी नंबरिंग के लिए जारी होने वाले आदेशों में साफ निर्देश दिए जाएंगे की टीन सेट , तिरपाल से ढके मकान दुकान और झोपडिय़ां को और निर्माणाधीन भावनो को भी नंबरिंग दी जाएगी। अधिकारियों ने कल बैठक में किस तरह से नंबरिंग दी जाना है उसकी जानकारी भी दी।
मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल प्रशिक्षण
इस बार पूरी प्रक्रिया मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कजाएगी। प्रगणक टैबलेट या मोबाइल के जरिए घर-घर जाकर आंकड़े दर्ज करेंगे। इंदौर जिले में प्रशिक्षण की भी व्यापक व्यवस्था की गई है। आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण के लिए कुल 9669 कार्मिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें 102 जिला स्तरीय अधिकारी, 41 चार्ज अधिकारी, 4 मास्टर ट्रेनर, 132 फील्ड ट्रेनर, 7956 प्रगणक (रिजर्व सहित) और 1334 पर्यवेक्षक (रिजर्व सहित) शामिल हैं। प्रत्येक प्रगणक को औसतन 180 से 200 मकानों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जबकि 6 से 10 ब्लॉकों पर एक पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाएगा।इस बार आमजन को भी स्वयं गणना की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए विशेष एप लॉन्च किया जाएगा, जिसमें लोग 15 दिन की अवधि में स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे। प्रगणक के आने पर यह जानकारी सत्यापित कर पोर्टल पर अपलोड की जाएगी और जरूरत पडऩे पर उसमें सुधार भी किया जा सकेगा।
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