
मुंबई । आशा भोसले (Asha Bhosle) राजकीय सम्मान के साथ (With State Honours) पंचतत्व में विलीन हो गईं (Was immersed in the Five Elements) । उनके बेटे आनंद भोसले ने मुखाग्नि दी ।
आशा ताई की गूंज हमेशा इस दुनिया में बनी रहेगी । मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश में समाई उनकी देह भले ही प्रकृति को लौटा दी गई हो, मगर उनकी आवाज हर दिल में हमेशा जिंदा रहेगी । उनकी अंतिम विदाई के साथ एक युग का अंत जरूर हुआ है, लेकिन उनके गाए गीत आने वाली पीढ़ियों तक उन्हें अमर बनाए रखेंगे ।

भारतीय संगीत जगत की अनमोल रत्न आशा भोसले का अंतिम संस्कार मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया । रविवार को 92 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद से ही पूरे देश में शोक की लहर है। प्रशासन और परिवार ने उनके अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए विस्तृत इंतजाम किए थे । आशा जी के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रखा गया था ।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को घोषणा की कि आशा भोसले के कॉन्सेप्ट पर आधारित एक म्यूजिक इंस्टिट्यूशन स्थापित करने के लिए सरकार सकारात्मक पहल करेगी । मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि आशा भोसले ने अपने जीवनकाल में संगीत क्षेत्र से जुड़े एक विशेष संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए आगे बढ़ाएगी और आशाताई के सपने को साकार करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। राज्य कैबिनेट की बैठक में दिवंगत आशाताई को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान डिप्टी चीफ मिनिस्टर सुनेत्रा अजीत पवार समेत अन्य कैबिनेट मंत्री भी मौजूद रहे। बैठक में सभी ने आशा भोसले के संगीत जगत में अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
आशा भोसले को शनिवार शाम कार्डियक अरेस्ट के बाद ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दुनिया भर के बड़े नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। अस्सी सालों तक अपनी जादुई आवाज से दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली आशा जी आज भले ही मौन हो गई हैं, लेकिन शिवाजी पार्क की मिट्टी में विलीन होने के साथ ही वे भारतीय संगीत के इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो जाएंगी।
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