
नई दिल्ली: India AI Impact Summit के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Union Minister Ashwini Vaishnav) ने AI, क्रिएटर इकॉनमी, कॉपीराइट और डीपफेक जैसे मुद्दों पर सरकार की सोच और आगे की रणनीति को सामने रखा. उन्होंने कहा कि क्रिएटर इकॉनमी तेजी से आगे बढ़ रही है और भारत से ही कई लोग ग्लोबल कंपनियां चला रहे हैं. इसमें AI का बड़ा रोल है. सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि AI से फायदा ज़्यादा हो और नुकसान कम से कम रहे.
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि AI एक रैपिड ग्रोइंग इकॉनमी है और भारत नए टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स को तेजी से एडॉप्ट कर रहा है. देश में 5G आ चुका है और सरकार की तरफ से री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग के लिए लगातार कोशिशें हो रही हैं. उनके मुताबिक मौजूदा वर्कफोर्स को नई टेक्नोलॉजी के हिसाब से री-स्किल करना ज़रूरी है. इसके लिए अलग-अलग ट्रैक्स पर काम हो रहा है, जिसमें AI सेफ्टी भी शामिल है.
उन्होंने बताया कि इस समिट का थीम ‘इंपैक्ट’ है और यहां दुनिया भर के टेक लीडर्स मौजूद हैं. मकसद सिर्फ टेक्नोलॉजी दिखाना नहीं, बल्कि ये समझना है कि AI का इंसानों और समाज पर क्या असर पड़ रहा है. कई सेक्टर्स में AI से पॉजिटिव बदलाव दिख रहे हैं, लेकिन इसके कुछ नेगेटिव पहलू भी हैं. हमें अच्छे को अपनाना है और नेगेटिव को डिस्कार्ड करना है.
कॉपीराइट और AI पर सरकार का रुख
कंटेंट कॉपीराइट पर सवाल का जवाब देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ये एक कॉम्प्लेक्स मामला है, क्योंकि AI को पब्लिक नॉलेज और पब्लिक कंटेंट से ट्रेन किया जाता है. लेकिन क्या ये मौजूदा मॉडल सही है और क्या इसमें बदलाव की जरूरत है, इस पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि IP राइट्स और इनोवेशन के बीच बैलेंस ज़रूरी है.
इसके लिए सिर्फ पॉलिसी नहीं, बल्कि टेक टूल्स की भी जरूरत होगी. उनके मुताबिक ऐसे मामलों में टेक्नो-लीगल सॉल्यूशन्स की जरूरत होती है, जहां टेक्नोलॉजी और लॉ, दोनों को ही सेफगार्ड किया जाए. सरकार इंडस्ट्री के साथ मिलकर एक स्ट्रक्चर बनाने पर काम कर रही है, लेकिन ये सिर्फ भारत का नहीं, बल्कि एक ग्लोबल चैलेंज है और इसे ग्लोबल लेवल पर ही टैकल करना होगा.
डीपफेक, मिस-इंफॉर्मेशन और ट्रस्ट का संकट
डीपफेक को लेकर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मिस-इंफॉर्मेशन, डिस-इंफॉर्मेशन और डीपफेक सोसाइटी के फाउंडेशन पर हमला कर रहे हैं. ये सदियों से बने ट्रस्ट को तोड़ने का काम कर रहे हैं. डीपफेक के तेजी से फैलने से लोगों का भरोसा इंस्टीट्यूशन्स से कमजोर हो रहा है और रूट ऑफ ट्रस्ट हिल रहा है.
उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए प्लेटफॉर्म्स, AI मॉडल डेवलपर्स और क्रिएटर्स – सभी को मिलकर जिम्मेदारी लेनी होगी. इसके लिए टेक्निकल और लीगल, दोनों तरह के सॉल्यूशन्स चाहिए. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर 20 देशों के मिनिस्टर्स के साथ चर्चा हुई है और सभी इस बात पर सहमत हैं कि आने वाले समय में सोसाइटी को AI के असर को अलग नज़रिए से देखना होगा.
एडवांस्ड लैब्स और क्रिएटर इकोसिस्टम पर फोकस
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत में दुनिया के कुछ सबसे एडवांस्ड लैब्स मौजूद हैं, जो ग्लोबल लेवल पर कंपटीट करते हैं. इसके साथ ही कंटेंट क्रिएटर्स के लिए स्पेशल लैब्स शुरू करने की योजना है, जिन्हें देश के करीब 15,000 स्कूलों में खोला जाएगा. इसका मकसद अगली पीढ़ी को टेक्नोलॉजी और क्रिएटिव टूल्स के साथ जल्दी जोड़ना है.
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