
नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई (Congress MP Gaurav Gogoi) ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) मिथ्या आरोप लगा रहे हैं (Is making False Allegations) । मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा रविवार को लोकसभा सांसद गौरव गोगोई पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अब कांग्रेस नेता ने तीखा पलटवार किया है।
मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस को गोगोई ने सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस करार दिया। मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि उन्हें दिल्ली और असम के उन पत्रकारों पर दया आती है, जिन्हें सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस झेलनी पड़ी।
बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम सरमा ने कहा कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और एलिजाबेथ गोगोई, जो लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई की पत्नी हैं, से जुड़े आरोप बहुत गंभीर प्रकृति के हैं और इन्हें मामूली मुद्दा नहीं माना जाना चाहिए। एक मौजूदा सांसद की संलिप्तता ने इस मुद्दे को एक सामान्य जांच के दायरे से ऊपर उठा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आरोप गंभीर हैं। जब एक मौजूदा सांसद, जो संसद में कांग्रेस पार्टी के उप नेता भी हैं, किसी भी तरह से पाकिस्तान से जुड़े होते हैं, तो मामला अपने आप ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गोगोई ने लिखा, “मुझे दिल्ली और असम के उन पत्रकारों पर दया आती है जिन्हें सदी की सबसे फ्लॉप प्रेस कॉन्फ्रेंस झेलनी पड़ी। यह एक सी-ग्रेड सिनेमा से भी बदतर । तथाकथित राजनीतिक रूप से चतुर मुख्यमंत्री ने सबसे बेवकूफी भरे और फर्जी मुद्दे उठाए । यह सुपर फ्लॉप हमारी जोमोय परिवर्तन यात्रा के बिल्कुल उलट है, जो मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा कब्जाई गई 12 हजार बीघा जमीन का खुलासा करने में हिट रही है।”
सीएम सरमा ने आगे बताया कि इस मामले की शुरू में असम पुलिस द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच की थी। एसआईटी की फाइंडिंग्स के आधार पर, आगे की जांच के लिए सीआईडी पुलिस स्टेशन में एक औपचारिक मामला दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मामले में एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी, जिसके बाद मामला असम कैबिनेट के सामने रखा गया। विचार-विमर्श के बाद, कैबिनेट ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपों के दायरे, संवेदनशीलता और व्यापक प्रभावों के लिए एक केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच की आवश्यकता है।
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