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UP के संस्कृत विद्यालयों में अब पढ़ाई जाएगी ‘बाल राम कथा’

April 02, 2026

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की औपचारिक शुरुआत हो गई है और इसी के साथ संस्कृत शिक्षा परिषद ने पूरे सत्र के लिए शैक्षणिक कैलेंडर भी जारी कर दिया है, जिसमें इस बार कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. अब हिंदी विषय के पाठ्यक्रम से संस्कृत का हिस्सा पूरी तरह हटा दिया गया है यानी सभी कक्षाओं के हिंदी प्रश्नपत्रों में संस्कृत भाषा से संबंधित कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा. सबसे खास बात ये है कि कक्षा 6 में सहायक पुस्तक के रूप में एनसीईआरटी की प्रसिद्ध ‘खंड काव्य बाल राम कथा’ पढ़ाई जाएगी.

वहीं, कक्षा 7 में ‘एनसीईआरटी बाल महाभारत कथा’ शामिल की गई है. ये दोनों पुस्तकें महान व्यक्तित्वों और भारत की विभूतियों की कहानियों के साथ पढ़ाई जाएंगी. परिषद ने उच्च कक्षाओं के लिए भी नए साहित्यिक खंड तय किए हैं. इसके अलावा कक्षा 9 में उपेंद्र नाथ अश्क का एकांकी ‘लक्ष्मी का स्वागत’ कक्षा 10 में ‘मातृ भूमि के लिए’, कक्षा 11वीं में श्री व्यथित का ‘राज मुकुट’ और कक्षा 12वीं में खंड काव्य के अंतर्गत श्री शिव बालक शुक्ल की ‘श्रवण कुमार’ पढ़ाई जाएगी.


  • संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव शिवलाल ने बताया कि हमारा प्रयास है कि छात्र मूल भारतीय साहित्य और संस्कृति से गहराई से जुड़ें. साथ ही स्क्रीन टाइम कम करने के लिए न्यूजपेपर पढ़ने की आदत को बढ़ावा दिया जाए. सभी स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान प्रमुख न्यूजपेपर पढ़वाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. यह बदलाव न केवल पाठ्यक्रम को अधिक समृद्ध बना रहा है, बल्कि छात्रों को डिजिटल स्क्रीन से दूर रखकर साहित्य और समसामयिक ज्ञान दोनों की ओर प्रोत्साहित भी कर रहा है. संस्कृत विद्यालयों के लाखों छात्र अब इन नई पुस्तकों के साथ नए सत्र की शुरुआत कर चुके हैं.

    राष्ट्रीय शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने पिछले साल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ-एसई) 2023 पर आधारित कक्षा 8वीं के लिए एक नई संस्कृत पाठ्यपुस्तक ‘दीपकम’ लॉन्च की थी. इसकी शुरुआत छात्रों में तार्किक और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए की गई है. पाठ्यपुस्तक में ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे आधुनिक पाठों को भी शामिल किया गया है. इस पाठ्यपुस्तक में मानवीय मूल्यों की काव्यमय झलकियां मिलती हैं और इसमें ‘हितोपदेश’ और ‘चरक संहिता’ जैसे संस्कृत ग्रंथों का परिचय दिया गया है.

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