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बैंकों के सामने नकदी की समस्या, Repo दर में कटौती के बाद भी ग्राहकों को 3 महीने राहत नहीं!

February 11, 2025

नई दिल्ली। आरबीआई (RBI) ने करीब पांच साल के बाद पहली बार रेपो दर में 0.25 फीसदी की कटौती (Repo rate cut by 0.25 percent) कर विभिन्न प्रकार के कर्ज लेने वाले ग्राहकों को राहत (Relief Loan taking customers) तो दी, लेकिन इसका लाभ मिलने में अब भी दो से तीन महीने का समय लग सकता है। इसकी प्रमुख वजह है…बैंकों के पास नकदी की किल्लत। इस समस्या से बाहर निकलने के लिए बैंक (Bank) रेपो दर (Repo rate ) में कटौती के बाद भी ज्यादा ब्याज देकर जमा जुटाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इससे बैंकों को जरूर फायदा होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों ने फिक्स्ड दर पर कर्ज लिया है, उन्हें रेपो दर में कटौती का लाभ पाने में बहुत अधिक समय लग सकता है। हालांकि, फ्लोटिंग दर पर कर्ज लेने वाले ग्राहकों को इसका लाभ जल्द मिलने की उम्मीद है। फिर भी, दोनों प्रकार के ग्राहकों को इसका फायदा मिलने में दो-तीन महीने लग सकते हैं। इसके बाद ही उनकी मासिक किस्त (ईएमआई) में कमी आएगी।


  • क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक अजीत वेलोनी ने कहा, फ्लोटिंग दर वाले कर्जों का बढ़ता अनुपात कुल लोन बुक का 40 फीसदी से अधिक पहुंच गया है और यह बाहरी दरों पर आधारित है। इसलिए, उधारकर्ताओं को ब्याज दर घटने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। बंधन एएमसी में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख सुयश चौधरी ने कहा, ब्याज दर में कटौती के लिए बैंकों को पहले अपनी वित्तीय स्थिति की समीक्षा करनी होगी, जैसा वे हर बार करते हैं। नए वित्त वर्ष यानी 2025-26 की पहली तिमाही जैसे ही शुरू होगी और नकदी के मोर्चे पर सुधार होगा, बैंक कर्ज की ब्याज दरों को कम करना शुरू कर सकते हैं।

    2.50 लाख करोड़ घट सकती है नकदी
    विशेषज्ञों ने भविष्य में नकदी की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। फरवरी, 2025 में सुधार दिखाने के बाद अगर आरबीआई अतिरिक्त तरलता उपाय लागू नहीं करता है, तो मार्च, 2025 के अंत तक प्रणाली की नकदी में 2.50 लाख करोड़ रुपये तक कमी आ सकती है। इससे बैंकों पर दबाव और ज्यादा बढ़ेगा, जिससे ब्याज दरें घटने में देरी होगी। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा, बाहरी बेंचमार्क से जुड़े ऋणों पर दर में कटौती का तत्काल असर हो सकता है।

    जमाकर्ताओं के लिए मुनाफा कमाने का मौका
    वर्तमान जमाकर्ताओं पर रेपो दर घटने या बढ़ने का कोई असर नहीं होगा। लेकिन, बैंकों को मिलने वाले नए जमा पर इसका असर जरूर देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जमा को लेकर बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल है। ऐसे में बैंक अगर जमा पर ब्याज दरें घटाते हैं, तो ग्राहक अपना पैसा निकालकर किसी और साधन में निवेश कर सकते हैं। ऐसे में बैंक इन जमाओं को बनाए रखने और नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कुछ और समय तक ऊंची ब्याज दर को बनाए रख सकते हैं।

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