
नई दिल्ली। कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) द्वारा अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक (Banu Mushtaq) को इस साल मैसूरु दशहरा (Mysuru Dussehra) का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किए जाने पर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया है। याचिकाकर्ताओं (Petitioners) का कहना है कि गैर-हिंदू (Non-Hindu) को परंपरागत पूजा-अर्चना का अधिकार देना अनुचित है। वहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट (High Court) ने पहले ही इस मामले को खारिज कर दिया था।
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस याचिका पर विचार करने के लिए हामी भर दी। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि दशहरा 22 सितंबर से शुरू हो रहा है, इसलिए मामले की तुरंत सुनवाई जरूरी है। उनका तर्क है कि एक गैर-हिंदू द्वारा अग्रेश्वरी पूजा करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।
15 सितंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मामले पर दायर चार जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इनमें से एक याचिका भाजपा के पूर्व सांसद प्रताप सिंघा ने दायर की थी। अदालत ने साफ कहा था कि किसी अलग धर्म के व्यक्ति द्वारा राज्य सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करना संविधान या किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन नहीं है।
तीन सितंबर को मैसूरु जिला प्रशासन ने औपचारिक रूप से मुश्ताक को उद्घाटन का आमंत्रण दिया था। इसके बाद भाजपा और अन्य विरोधी समूहों ने कड़ा एतराज जताया। उनका कहना है कि मुश्ताक ने पहले भी ऐसे बयान दिए हैं जिन्हें “हिंदू विरोधी” और “कन्नड़ विरोधी” माना गया है। इसी पृष्ठभूमि में इस विवाद ने तूल पकड़ा।
मैसूरु दशहरा का उद्घाटन पारंपरिक रूप से चामुंडेश्वरी देवी के मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होता है। देवी की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर और वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच राज्यपाल या आमंत्रित विशिष्ट अतिथि उद्घाटन करते हैं। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है और इसी वजह से एक गैर-हिंदू को आमंत्रित किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

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