वाशिंगटन। नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) के आयोजकों ने इस साल की विजेता- वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो (Maria Corina Machado) के नाम के लीक होने की आशंका के चलते आंतरिक जांच शुरू की है। यह कदम तब उठाया गया जब ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पॉलीमार्केट पर माचाडो के पक्ष में लगाए गए दांव घोषणा से कुछ घंटे पहले ही अचानक बढ़ गए। अधिकारियों को शक है कि यह किसी सूचना लीक का नतीजा हो सकता है, जिससे कुछ लोगों ने लाखों डॉलर का मुनाफा कमाया। यह घटना नोबेल पुरस्कार की गोपनीयता पर सवाल खड़े कर रही है।
पॉलीमार्केट खुद को “दुनिया का सबसे बड़ा प्रेडिक्शन मार्केट” बताता है। उसने इस पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया देते हुए केवल एक शब्द में जवाब दिया- “Whoops.”
संदेहास्पद दांवों ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक, एक ट्रेडर ने “dirtycup” यूजरनेम से अकाउंट बनाया था। उसने घोषणा से कुछ घंटे पहले ही करीब 70,000 डॉलर (लगभग ₹58 लाख) का दांव माचाडो के पक्ष में लगाया। परिणाम घोषित होने के बाद उसे लगभग 30,000 डॉलर (25 लाख रुपये) का लाभ हुआ। दिलचस्प बात यह है कि इस यूजर ने अपना अकाउंट इसी महीने खोला था और इससे पहले किसी अन्य मार्केट में सट्टा नहीं लगाया था।
इसी तरह वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक और निवेशक, यूजरनेम “6741”, ने भी घोषणा से लगभग 12 घंटे पहले माचाडो पर भारी दांव लगाया। उस समय उसकी जीत की संभावना मात्र 5 प्रतिशत थी। लेकिन इस यूजर ने लगातार लॉन्ग-शॉट दांव लगाए, जिससे अन्य सट्टेबाजों ने भी उसी दिशा में निवेश शुरू किया और देखते-देखते माचाडो की संभावना 70 प्रतिशत तक पहुंच गई। इस यूजर को 50,000 डॉलर (42 लाख रुपये) से अधिक का लाभ हुआ।
संभावित लीक पर सवाल
नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता की घोषणा हर साल सख्त गोपनीयता में की जाती है। नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के अंदर केवल चुनिंदा लोगों को ही विजेता के नाम की पूर्व जानकारी होती है। ऐसे में कुछ घंटे पहले बड़े पैमाने पर लगाए गए इन दांवों ने जानकारी लीक होने की संभावना को मजबूत कर दिया है। नोबेल आयोजकों ने कहा कि वे सभी डिजिटल चैनल्स और आंतरिक संचार की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या किसी ने गोपनीय सूचना बाहरी स्रोतों तक पहुंचाई थी।
क्या है पॉलीमार्केट?
पॉलीमार्केट एक ब्लॉकचेन-आधारित “प्रेडिक्शन मार्केट” प्लेटफॉर्म है, जहां यूजर ‘हां’ या ‘ना’ जैसे सवालों पर पैसे लगाते हैं। उदाहरण के लिए – “क्या 2025 में अमेरिका में मंदी आएगी?” या “कौन जीतेगा नोबेल शांति पुरस्कार?” इन प्लेटफॉर्म्स पर दांव लगाने वालों के व्यवहार से राजनीतिक और वैश्विक घटनाओं के रुझान का भी अंदाजा लगाया जाता है। हालांकि, यह घटना दिखाती है कि अगर संवेदनशील सूचनाएं किसी तरह बाहर आती हैं, तो वित्तीय लाभ के लिए उनका दुरुपयोग संभव है। नोबेल कमेटी ने कहा है कि जांच पूरी होने तक कोई भी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी।
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