
नई दिल्ली । बिहार (Bihar) में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) एक बार फिर परंपरागत कारकों जातीय गणित, गठबंधन और कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित दिखाई दे रहे हैं। एक नए सर्वे (Survey) से साफ संकेत मिला है कि बिहार की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की बजाय पारंपरिक वोटिंग पैटर्न ही जारी रहने वाला है। हालांकि, प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) की जन सुराज पार्टी (JSP) ने चुनावी परिदृश्य में तीसरे ध्रुव के रूप में कुछ हद तक अनिश्चितता जरूर पैदा की है। यह सर्वे Ascendia ‘Battle of Bihar 2025 के नाम से किया गया है।
इस सर्वे से यह भी स्पष्ट होता दिख रहा है कि बिहार की राजनीतिक परिदृश्य अभी भी दो खेमों महागठबंधन और एनडीए के बीच बंटा हुआ है। पारंपरिक वोट बैंक अपनी जगह पर मजबूत दिखाई दे रहे हैं और उनमें ज्यादा हिलचल नहीं है।
मुस्लिम-यादव समीकरण का क्या है हाल?
बिहार की लगभग 17% मुस्लिम आबादी परंपरागत रूप से महागठबंधन के साथ रही है। 2020 में सीमांचल क्षेत्र में कुछ वोट AIMIM को चले गए थे, जिससे एमजीबी को नुकसान उठाना पड़ा। 2020 में 75% मुस्लिम वोट एमजीबी को मिला था, जो 2024 लोकसभा चुनाव में बढ़कर 83% हो गया। मुस्लिम समुदाय में यह मैसेज साफ है कि AIMIM के कारण वोट बंट रहा है और भाजपा को फायदा मिल रहा है।
सर्वे में कहा गया है कि इस बार मुस्लिम मतदाता फिर से महागठबंधन की ओर झुक सकते हैं, लेकिन असंतोष भी है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में बड़े मुस्लिम नेताओं की अनुपस्थिति से नाराजगी जताई जा रही है। मुस्लिम समुदाय टिकट बंटवारे में बड़ी हिस्सेदारी और उपमुख्यमंत्री पद की मांग भी कर रहा है।
हालांकि प्रशांत किशोर ने मुस्लिमों से अनुपात के हिसाब से प्रतिनिधित्व देने का वादा किया है। हालांकि मुस्लिम समाज में उनके प्रति अविश्वास भी गहरा है। प्रशांत किशोर पर भाजपा का प्रॉक्सी होने और संदिग्ध फंडिंग स्रोतों के आरोप मुस्लिम समाज में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
दलित और अति पिछड़ा वोट
बिहार में दलित समुदाय लगभग 20% है। यहाँ एनडीए का प्रभाव मजबूत माना जा रहा है। पासवान (5%) और मुसहर (3%) समुदाय क्रमशः चिराग पासवान और जीतनराम मांझी के कारण एनडीए के साथ दिखाई देते हैं। वहीं, चमार (5%) समुदाय ऐतिहासिक कारणों से महागठबंधन की ओर झुकाव रखता है। अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) की आबादी 26% है। यह समुदाय अब तक एनडीए के साथ खड़ा रहा है। सर्वे के मुताबिक, यही रुझान इस बार भी रह सकता है।
बिहार में OBC किसके साथ?
बिहार में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की आबादी करीब 25% है। यह वर्ग इस बार भी बंटा हुआ हैं। यादव (11%) पूरी तरह से लालू परिवार और राजद के साथ हैं, जबकि गैर-यादव ओबीसी मतदाता (कोइरी-कुर्मी/कुशवाहा) एनडीए की ओर झुकाव रखते हैं। इनकी आबादी करीब 7 प्रतिशत है। आपको बता दें कि नीतीश कुमार स्वयं कुर्मी समुदाय से आते हैं, जबकि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा कुशवाहा समाज से हैं। हालांकि, सर्वे में यह भी बात सामने निकलकर आई है कि कुशवाहा समुदाय महागठबंधन की ओर खिसक सकता है जैसा कि हाल के लोकसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश में देखा गया था।
रिपोर्ट बताती है कि महागठबंधन को मगध और भोजपुर में सीटों का नुकसान हो सकता है, जबकि पूर्णिया में कुछ बढ़त मिलने की संभावना है। 2020 विधानसभा चुनाव में एनडीए ने सात जोन में बढ़त हासिल कर 52 सीटें ली थीं, जबकि महागठबंधन तीन जोन में 37 सीटों पर आगे था। अंतिम नतीजों में एनडीए को 125 और एमजीबी को 110 सीटें मिली थीं।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved