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बिहार में किसानों के साथ धोखा, जमीन अधिग्रहण में एक हजार करोड़ रुपये कम दिए; ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा

August 25, 2025

नई दिल्‍ली । बिहार(Bihar) में रेलवे, रोड सहित अन्य विकासात्मक परियोजनाओं(Developmental Projects) के लिए भूमि अधिग्रहण(Land acquisition) में किसानों को कम पैसा मिल रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारी जमीन का मूल्यांकन कम कर रहे हैं। अधिकारियों की गलती से दर्जनभर से अधिक जिलों के सैकड़ों किसानों को करीब एक हजार करोड़ कम मुआवजा मिला है। किसानों की इस हकमारी का खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। अब राजस्व विभाग ने जिलों को संबंधित विभागों से अंतर राशि की मांग करने को कहा है ताकि किसानों को वास्तविक मुआवजा दिया जा सके।


  • परियोजनाओं के लिए शहरी क्षेत्र में दोगुना और इसके बाद दूरी के आधार पर चार गुना तक मुआवजा का प्रावधान है। जमीन अधिग्रहण की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2015-16 में पटना, भागलपुर और भोजपुर में 18.71 लाख उपकरण निर्धारित/आरोपित नहीं की गई। वित्तीय वर्ष 2016-17 में बक्सर, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी में किसानों को 873.46 करोड़ मुआवजे का कम भुगतान हुआ। पटना और औरंगाबाद में 4.80 करोड़ कम मुआवजा मिला।

    किशनगंज, बक्सर, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी में एकमुश्त पुनर्वास भत्ता का भुगतान नहीं हुआ। 2016-17 में ही किशनगंज, बक्सर, पटना, नालंदा, भागलपुर, औरंगाबाद, सीतामढ़ी और गया में 96.50 करोड़ मुआवजा कम दिया गया। वहीं वर्ष 2021-22 में अररिया एवं रोहतास में 16.73 करोड़ कम मुआवज दिया।

    स्थानीय अधिकारियों की गलती से परेशानी

    जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों की गलती के कारण किसानों को कम मुआवजा मिला। वर्तमान मूल्य के बजाए पदाधिकारियों ने किसानों को पूर्व की दर के अनुसार ही मुआवजा राशि तय कर भुगतान कर दिया। सूत्रों के अनुसार जिन परियोजनाओं में किसानों को कम पैसा मिला है, उसमें पटना-बक्सर, पटना-गया-डोभी, पटना-बख्तियारपुर जैसी अन्य सड़क परियोजनाएं हैं।

    ⦁ मुआवजे के लिए कार्यालयों का चक्कर काट रहे किसान

    ⦁ सभी जिले में जमीन अधिग्रहण में लग रहा है अधिक समय

    ⦁ जमीन अधिग्रहण में देरी से परियोजनाएं विलंबित हो रही

    विभागों से राशि मिलने पर किसानों को भुगतान

    राजस्व विभाग ने संबंधित विभागों से अंतर राशि की मांग करने का निर्देश दिया है। जिला भू-अर्जन कार्यालय और काला (जमीन अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकार) को इस आदेश पर अनुपालन करने को कहा गया है। भू-अर्जन निदेशालय स्तर पर परियोजना एवं लंबित राशि की सूची तैयार करने को कहा गया है ताकि संबधित विभागों से समन्वय स्थापित हो सके। राशि आने पर किसानों के खाते में भेजी जाएगी।

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