
जयपुर । वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अशोक गहलोत (Senior Congress leader Ashok Gehlot) ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार (BJP Government at the Centre) ने राजनीतिक प्रतिशोध के लिए (For Political Revenge) नया संविधान संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया (Has introduced New Constitution Amendment Bill) । उन्होंने कहा कि यह विधेयक उच्च पदों पर बैठे लोगों को आपराधिक मामलों में आरोप लगने पर पद से हटाने के लिए लाया जा रहा है और यह विपक्षी नेताओं की राजनीति को खत्म करने का एक प्रयास है।
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि बीते 10 वर्षों में कई विपक्षी नेताओं को राजनीतिक प्रतिशोध के चलते जेल भेजा गया, जहां वे बिना जमानत के कई महीनों तक रहे, लेकिन बाद में अदालत में निर्दोष साबित हुए। उन्होंने कहा कि भाजपा अब एक ऐसा कानून बना रही है, जिसके तहत किसी भी महत्वपूर्ण पद पर बैठे नेता को गिरफ्तार कर जेल में डालकर पद से बर्खास्त किया जा सकेगा।
गहलोत ने इस विधेयक को ‘घोर अलोकतांत्रिक’ और ‘तानाशाही मानसिकता’ का परिचायक बताया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह कानून केवल विपक्ष के लिए नहीं है, बल्कि सत्ता पक्ष के उन नेताओं के खिलाफ भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है जो शीर्ष नेतृत्व की इच्छा के अनुसार काम नहीं करेंगे। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस विधेयक का विरोध करने की अपील की है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की मौजूदा सरकार पर राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि उनकी कांग्रेस सरकार ने यह योजना केंद्र की सीजीएचएस (CGHS) योजना की तर्ज पर शुरू की थी, ताकि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस इलाज मिल सके। गहलोत के अनुसार, दिसंबर 2023 तक यह योजना बिना किसी परेशानी के चली, लेकिन राज्य में सत्ता बदलने के बाद से ही इसमें दिक्कतें आ रही हैं। अशोक गहलोत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर महीने कर्मचारियों की सैलरी से राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम का पैसा कटने के बावजूद लाखों लोगों को इलाज के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स ने भुगतान न मिलने के कारण इस योजना के तहत इलाज और दवाइयां देना बंद कर दिया था, जिसके बाद सरकार ने उन्हें भुगतान का वादा किया। हालांकि, गहलोत ने आरोप लगाया कि भुगतान न होने के कारण एक बार फिर अस्पतालों ने इलाज देना बंद कर दिया है। उन्होंने मौजूदा सरकार से इस योजना को गंभीरता से चलाने के लिए अपनी “नीयत और नीति” दिखाने की अपील की है।
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