
नई दिल्ली । कर्नाटक मंत्रिमंडल(Karnataka Cabinet) ने शुक्रवार को जस्टिस नागमोहन दास आयोग(Justice Nagmohan Das Commission) की जांच रिपोर्ट(Investigation Report) के आलोक में राज्य की पिछली भाजपा सरकार के खिलाफ 40 प्रतिशत कमीशन के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का फैसला किया है। कर्नाटक के कानून एवं संसदीय मामलों के मंत्री एच के पाटिल ने संवाददाताओं को बताया कि विशेष जांच दल दो महीने में जांच पूरी करके राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा।
पाटिल ने कहा कि इसके बाद जांच रिपोर्ट कैबिनेट की बैठक में पेश की जाएगी। मंत्री के मुताबिक, जस्टिस नागमोहन दास की रिपोर्ट ने तीन लाख कार्यों में से 1,729 कार्यों का नमूना लिया और जांच की। मंत्री ने कहा, “रिपोर्ट दो खंडों में है। इसमें अनियमितताओं के आरोपों के बारे में कहा गया है।’
पाटिल ने कहा कि जारी की गई राशि स्वीकृत राशि से अधिक थी, अनापत्ति प्रमाण पत्र समय से पहले जारी किया गया था, और निविदा प्रक्रिया में भी हस्तक्षेप किया गया था। मंत्री ने कहा, ‘एसआईटी में क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। SIT को दो महीने में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। यह न्यायमूर्ति नागमोहन दास द्वारा लिए गए केवल 1,729 नमूनों की नहीं, बल्कि पूरे मामले की जांच करेगी।’
बता दें कि कर्नाटक राज्य ठेकेदार संघ ने आरोप लगाए ते कि बासवराज बोम्मई की सरकार में 40 फीसदी कमीशनखोरी आम हो गई थी। 2022 में यूनियन ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि उन्हें टेंडर पाने और काम के भुगतान के लिए 40 फीसदी रिश्वत देनी पड़ती है। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया। चुनाव में कांग्रेस को सफलता भी हासिल हो गई। इसके बाद सिद्धारमैया ने नागमोहन दास जांच आयोग बना दिया था।
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