
इंदौर। भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों के बाद पीडि़त परिवारों से मिलने पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को प्रभावित क्षेत्र में जाने से कई बार रोका गया। लगातार प्रयासों के बाद उन्हें केवल 10 लोगों के साथ मृतकों के परिजनों से मिलने की अनुमति दी गई। इस दौरान पटवारी ने स्पष्ट कहा कि वे यहां कोई राजनीति करने नहीं, बल्कि अपने परिवारजनों के गम में शामिल होने आए हैं। जीतू पटवारी भागीरथपुरा में आर्य समाज मंदिर के पास मृतक के घर शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे, जिसके बाद पुलिस द्वारा मंगवाई गई उनकी गाड़ी में ना बैठते हुए वह पैदल ही पुलिस का सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए रहवासियों के बीच जा पहुंचे, जहां पर उन्होंने घरों के बाहर खड़ी महिलाओं से सवाल कर डाला कि मुझे यहां आना था कि नहीं आना था बहनों, क्योंकि आने से पहले मुझे तीन-चार बार रोका गया।
मैं मेरे परिवार से मिलने आया हूं, मुझे अन्दर तक आने से रोका जा रहा था, ताकि भाजपा का पाप उजागर ना हो जाए। उन्होंने कहा कि जब वे पीडि़तों से मिले तो माताएं-बहनें रोते हुए कह रही थीं कि अब उनके परिवार का कोई पालन-पोषण करने वाला नहीं बचा है। यह हादसा नहीं, बल्कि एक तरह से हत्याएं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार अन्य घटनाओं में एक-एक करोड़ रुपए का मुआवजा देती है, तो यहां मृतकों की जान की कीमत सिर्फ 2 लाख रुपए क्यों तय की गई। छह माह से क्षेत्र के रहवासी पार्षद से लेकर नगर निगम अधिकारियों तक शिकायतें करते रहे, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। पीडि़त माताएं-बहनें आंखों में आंसू लेकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रही हैं।
पुराने भागीरथपुरा में तो घुस ही नहीं पाए कांग्रेसी
कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को प्रशासन ने पुराने भागीरथपुरा में तो जाने ही नहीं दिया, जबकि सबसे पहले गली नं. 3, भट्टे वाला रोड और फर्शी वाली गली में ही मौते हुए थीं, जिसके बाद ही हडक़ंप मचा और इतने लोगों की मौत सामने आई थीं। पुराने भागीरथपुरा में गमजदा लोग पटवारी का इंतजार ही करते रह गए।
स्वच्छता का इंदौर मॉडल हुआ बेनकाब, नलों से निकलीं मौतें
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि हादसा नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही, निर्णयों में देरी और संवेदनहीन शासन का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा बताई गई मौतों के आंकड़े वास्तविकता से कम हैं। उन्होंने कहा कि महीनों से नागरिक, पार्षद और पत्रकार गंदे पानी की शिकायतें करते रहे, लेकिन जलप्रदाय विभाग और नगर निगम ने तब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जब तक निर्दोष जानें नहीं चली गईं। उमंग सिंघार ने कहा कि इंदौर लगातार आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित हुआ और नगर निगम का बजट 8,000 करोड़ से अधिक है, इसके बावजूद नागरिकों को नल से साफ पानी तक नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि आज स्वच्छता पुरस्कार जनता के लिए व्यंग्य बन चुका है।
ढाई साल दबा रहा पाइपलाइन टेंडर
उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि 25 नवंबर 2022 को मेयर-इन-काउंसिल में नई पेयजल पाइपलाइन का निर्णय लिया गया, लेकिन उसका टेंडर जुलाई 2025 में जाकर जारी हुआ। टेंडर के बाद भी करीब पांच महीने तक काम शुरू नहीं हुआ। उन्होंने पूछा कि यदि समय पर काम होता तो क्या यह त्रासदी रोकी नहीं जा सकती थी? देरी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?
निलंबन नहीं, जवाबदेही तय हो
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कुछ छोटे अधिकारियों को निलंबित कर देना जवाबदेही तय करना नहीं है, बल्कि डैमेज कंट्रोल है। बड़े फैसले लेने वाले अधिकारी और राजनीतिक पदाधिकारी आज भी सुरक्षित हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ‘आग लगाने वाला बच जाए और माचिस पकडऩे वाले को सज़ा दे दी जाए, यही भाजपा सरकार की कार्यशैली है। ‘
मुआवजा अपमानजनक
उमंग सिंघार ने मृतकों के परिजनों को दिए जा रहे 2 लाख के मुआवजे को नाकाफी बताते हुए प्रति मृतक 1 करोड़ मुआवजे और बीमार पीडि़तों की इलाज की भरपाई की मांग की।
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