
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल (Union Minister Piyush Goyal) ने अमेरिका (America) के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते (Trade agreements) और तेल खरीद को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अमेरिका से तेल, एलएनजी और एलपीजी खरीदना भारत के रणनीतिक हित में है, क्योंकि इससे ऊर्जा सोर्सेज में विविधता आती है। लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि तेल खरीदने के फैसले पूरी तरह घरेलू खरीदारों पर निर्भर करते हैं।
गोयल ने मीडिया से बातचीत में कहा, “ट्रेड डील यह तय नहीं करती कि कौन किससे और क्या खरीदेगा। यह सिर्फ दो देशों के बीच व्यापार को आसान बनाती है और विशेष पहुंच देती है। जब अमेरिका पर 18 फीसदी टैरिफ है, एफटीए के माध्यम से हमें अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बढ़त मिलती है।” उन्होंने रूसी तेल से जुड़े सवाल पर सीधे जवाब नहीं दिया और कहा कि इस मामले में विदेश मंत्रालय बेहतर जवाब दे सकता है।
अमेरिका से 500 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
गोयल ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीद सकता है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला शामिल हैं। उन्होंने इसे अत्यंत रूढ़िवादी आंकड़ा बताया और कहा कि भारत अभी लगभग 300 अरब डॉलर मूल्य के सामान अमेरिका से आयात कर सकता है, जो फिलहाल अन्य देशों से आता है।

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