
नई दिल्ली । केंद्र सरकार (Central Government) ने न्यू मैंगलोर पोर्ट अथॉरिटी के प्रस्ताव (Proposal of New Mangalore Port Authority) को मंजूरी दे दी (Has Approved) । इसके तहत न्यू मैंगलोर पोर्ट पर बर्थ नंबर 9 का पुनर्विकास किया जाएगा। यह काम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत डीबीएफओटी आधार पर किया जाएगा ।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना को 25 मार्च 2026 को मंजूरी दी गई। यह कदम भारत के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और समुद्री लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। करीब 438.29 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना को एक निजी कंपनी द्वारा विकसित किया जाएगा, जिसे ओपन टेंडर प्रक्रिया के जरिए चुना जाएगा।
इस प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 10.90 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) होगी। साथ ही, प्रोजेक्ट को संभालने वाली कंपनी पांचवें साल तक कम से कम 7.63 एमटीपीए कार्गो हैंडल करने की गारंटी देगी। निर्माण कार्य को पूरा होने में करीब 2 साल लगेंगे, जबकि पूरे प्रोजेक्ट की अवधि 30 साल की होगी। इस योजना के तहत पुराने ढांचे को हटाकर बर्थ नंबर 9 को पूरी तरह से आधुनिक बनाया जाएगा। यहां पर कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद (पीओएल) और एलपीजी जैसे लिक्विड बल्क कार्गो को संभाला जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, इस आधुनिकीकरण के तहत बर्थ की गहराई (ड्राफ्ट) को मौजूदा 10.5 मीटर से बढ़ाकर 14 मीटर किया जाएगा और भविष्य में इसे 19.8 मीटर तक बढ़ाने की व्यवस्था भी रखी जाएगी। इससे पोर्ट पर 2 लाख डीडब्ल्यूटी तक के बड़े जहाज आसानी से आ-जा सकेंगे, जिसमें वेरी लार्ज गैस कैरियर्स (वीएलजीसी) भी शामिल हैं।पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा कि यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से आधुनिक बनाने का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के जरिए पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को हटाकर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे पोर्ट की क्षमता बढ़ेगी और भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी मजबूत स्थिति बना सकेगा। करीब 50 साल पुराने ढांचे की जगह नई आधुनिक संरचनाएं बनाई जाएंगी, जिनकी उम्र लगभग 50 साल तक होगी। इससे लंबे समय तक स्थिर और टिकाऊ संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। नई क्षमता के साथ यह पोर्ट क्षेत्र में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा। बड़े जहाजों की आवाजाही से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और पोर्ट की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
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