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सैन समाज में बदलाव: सगाई के बाद न फोन पर बात करेंगे मंगेतर, ना ही दूल्हे का जूता चोरी होगा

February 20, 2026

Weddingरायपुर। रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न इलाकों में रहने वाले सेन समाज ने बदलते सामाजिक हालात (Social Conditions) को देखते हुए विवाह परंपराओं (Wedding traditions) में कई नए नियम लागू करने का फैसला किया है। समाज का कहना है कि सगाई टूटने की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है, हालांकि नई पीढ़ी में इन फैसलों को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं।

सगाई के बाद मंगेतरों की निजी बातचीत पर रोक

समाज की जिला स्तरीय बैठक बालोद में आयोजित की गई, जिसमें तय किया गया कि सगाई के बाद विवाह से पहले लड़का-लड़की आपस में फोन पर अकेले बात नहीं करेंगे। जरूरत पड़ने पर बातचीत केवल परिवार के सदस्यों, खासकर माता-पिता की मौजूदगी में ही की जा सकेगी। समाज पदाधिकारियों के अनुसार, हाल के वर्षों में सगाई टूटने के मामलों की समीक्षा की गई, जिसमें पाया गया कि मोबाइल पर लंबी बातचीत के दौरान हुए विवाद कई रिश्तों के टूटने का कारण बने।



  • शादी की रस्मों में भी बदलाव
    बैठक में पारंपरिक विवाह रस्मों को लेकर भी कुछ नए निर्णय लिए गए—
    दुल्हन की बहनों द्वारा दूल्हे का जूता छिपाने की रस्म अब नहीं होगी, क्योंकि इससे कई बार विवाद की स्थिति बनती थी।
    सगाई समारोह में सीमित संख्या (करीब 15–20 लोग) ही शामिल होंगे।
    विवाह मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
    प्लास्टिक के उपयोग से बचते हुए पत्तल में भोजन परोसने को बढ़ावा दिया जाएगा।
    धर्म परिवर्तन पर सामाजिक संबंध समाप्त करने का भी निर्णय

    समाज ने यह भी तय किया है कि यदि कोई सदस्य अन्य धर्म अपनाता है, तो उसके साथ सामाजिक “रोटी-बेटी” का संबंध समाप्त कर दिया जाएगा। इस निर्णय को लेकर भी अंदरूनी स्तर पर चर्चा जारी है।

    प्रदेश स्तर पर लागू करने की तैयारी

    समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था फिलहाल बालोद जिले में लागू की गई है, लेकिन भविष्य में इसे पूरे छत्तीसगढ़ में लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

    युवाओं की राय बंटी

    नई पीढ़ी के बीच इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
    कुछ युवाओं का मानना है कि यह कदम रिश्तों को अनावश्यक विवाद से बचाएगा, वहीं अन्य का कहना है कि विवाह से पहले संवाद जरूरी है ताकि जीवनसाथी को बेहतर समझा जा सके।

    परंपरा बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बहस

    समाज का तर्क है कि ये नियम पारिवारिक स्थिरता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि बदलते समय में आपसी समझ और संवाद को सीमित करना व्यावहारिक नहीं है। इसी कारण यह फैसला अब सामाजिक विमर्श का विषय बन गया है—जहां एक ओर परंपरा है, तो दूसरी ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आधुनिक सोच।

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