
शंघाई । तिब्बत पर कब्जे के 70 साल बाद भी चीन वहां की स्थिति को लेकर सशंकित है। वह वहां पर अभेद्य किलेबंदी की बात कर रहा है, ऐसी दीवार खड़ी करने की बात कह रहा है जो अलगाववाद को आगे न बढ़ने दे। इसके लिए स्कूलों में चीन से जुड़ाव वाला पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। इससे लोगों की सोच में बदलाव आएगा।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यह बात सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की तिब्बत पर आयोजित कार्यशाला में कही है। उन्होंने कहा, तिब्बत को चीन की राष्ट्रीय एकता से जोड़ा जाए जिससे वे अलगाववाद के खिलाफ खुद खड़े हों। चिनफिंग तिब्बत की जिस सोच में बदलाव की बात कह रहे हैं, वह वहां की सांस्कृतिक पहचान में बदलाव की बात है। वहीं, दूसरी ओर भारत में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा इसे सांस्कृतिक नरसंहार कहते हैं। वह कहते हैं कि चीन तिब्बत की पहचान बदलने पर आमादा है। वह तिब्बतियों को उनकी पहचान से दूर कर देना चाहता है जिससे वे मानसिक रूप से चीन के गुलाम बन जाएं।
शी ने पार्टी कार्यक्रम में कहा, तिब्बत के स्कूलों में राजनीतिक और विचारधारा वाली शिक्षा दी जाए जिससे उनमें पढ़ने वाले छात्र चीन के साथ जुड़ाव महसूस करें। उनके हृदय में चीन के लिए प्यार की भावना उमड़े। इससे आधुनिक, संपन्न, खूबसूरत, शांत और भाईचारे वाले तिब्बत का निर्माण होगा। जिनपिंग ने इस सबके लिए तिब्बत में कम्युनिस्ट पार्टी को मजबूत करने पर भी जोर दिया। कहा, पार्टी जब वहां पर अपना काम बढ़ाएगी, तब लोग खुद ब खुद उसकी विचारधारा से जुड़ते चले जाएंगे।
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