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कॉमरेड हेतराम बेनीवाल का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन

February 24, 2026


श्रीगंगानगर । कॉमरेड हेतराम बेनीवाल का पार्थिव शरीर (Comrade Hetram Beniwal’s Mortal) पंचतत्व में विलीन हो गया (Remains were immersed in the Five Elements) । उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे उनके पैतृक गांव 8 एलएनपी में किया गया।

  • राजस्थान की वामपंथी राजनीति के स्तंभ और किसान-मजदूर आंदोलनों के प्रखर नेतृत्वकर्ता, माकपा के पूर्व विधायक कॉमरेड हेतराम बेनीवाल अब हमारे बीच नहीं रहे। 94 वर्षीय बेनीवाल ने सोमवार रात 10:58 बजे श्रीगंगानगर के टांटिया अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से मारवाड़ से लेकर शेखावाटी और विशेषकर नहरी क्षेत्र के किसान जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

    पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, बेनीवाल को तीन दिन पहले हीमोग्लोबिन की कमी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान उन्हें निमोनिया हो गया, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई। सोमवार देर रात उनके पार्थिव शरीर को उनके निवास 8 एलएनपी ले जाया गया। उनका अंतिम संस्कार आज, मंगलवार शाम 4 बजे उनके पैतृक गांव 8 एलएनपी में किया गया। 16 अक्टूबर 1932 को जन्मे हेतराम बेनीवाल ने अपना पूरा जीवन मार्क्सवादी विचारधारा और जनसेवा को समर्पित कर दिया।

    उन्होंने 1967 में संगरिया से अपना पहला चुनाव लड़ा। वर्ष 1990-91 में वे संगरिया से विधायक निर्वाचित हुए। हालांकि, विधानसभा भंग होने के कारण उनका कार्यकाल ढाई साल ही रहा। उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति को 2004 में सादुलशहर विधानसभा क्षेत्र से विराम दिया। कांग्रेस शासन में आपातकाल के दौरान उन्होंने जेल की यातनाएं झेलीं, लेकिन सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

    आंदोलनों के रणनीतिकारबेनीवाल को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने अपनी संगठनात्मक शक्ति से सत्ता के गलियारों को हिला दिया। 1971-72 में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण में जमीन आवंटन को लेकर चले आंदोलन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया की सरकार को अपने निर्णय बदलने पर मजबूर कर दिया था। 2003-04 के दौरान वसुंधरा सरकार के समय हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन में बेनीवाल की भूमिका निर्णायक रही। उनके एक इशारे पर हजारों किसान सड़कों पर उतर आते थे।

    हेतराम बेनीवाल अपनी बेबाक भाषण शैली के लिए विख्यात थे। वे राजस्थान के उन बिरले नेताओं में से थे जो बिना लाउडस्पीकर के भी हजारों की भीड़ को घंटों तक मंत्रमुग्ध कर सकते थे। विधानसभा के भीतर भी उनकी स्पष्टवादिता के कायल विपक्षी नेता भी थे। पूर्व विधायक पवन दुग्गल सहित कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राजनीति में जमीनी संघर्ष की सीख बेनीवाल जी से ही मिलती है। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि शोषितों और वंचितों के मसीहा थे। उनकी पत्नी चंद्रावली देवी का पिछले वर्ष ही निधन हुआ था। उनके परिवार में अब दो बेटे और एक बेटी हैं।

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