
नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) ने गुरुवार को यूरोपीय संघ (European Union) के कार्बन टैक्स (Carbon Tax) की वजह से निर्यात की बढ़ती लागत पर चिंता जताई है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि इस महीने के आखिर में साइन होने वाले इंडिया-ईयू एटीए में इस ‘नामंजूर’ नॉन-टैरिफ बैरियर का ध्यान रखा जाना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कहा कि लंबे समय से इंतजार किया जा रहा इंडिया-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कथित तौर पर इस महीने के आखिर में फाइनल हो जाएगा।
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित भारत-ईयू एफटीए को इस महीने अंतिम रूप दिया जा सकता है। ऐसे में ईयू का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) भारतीय उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। उन्होंने बताया कि गुरुवार से भारतीय स्टील और एल्युमिनियम निर्यातकों को यूरोपीय संघ के 27 देशों में निर्यात पर कार्बन टैक्स देना होगा। वित्त वर्ष 2024-25 में EU को भारत का स्टील और एल्युमिनियम निर्यात औसतन 5.8 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष 7 अरब डॉलर था। यह गिरावट CBAM लागू होने की तैयारी के चलते पहले ही शुरू हो चुकी थी।
जयराम रमेश ने थिंक-टैंक GTRI के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि कई भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पादों की कीमतें 15 से 22 प्रतिशत तक कम करनी पड़ सकती हैं, ताकि ईयू के आयातक उसी मार्जिन से कार्बन टैक्स का भुगतान कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि कार्बन उत्सर्जन की विस्तृत रिपोर्टिंग और जटिल दस्तावेजी प्रक्रियाएं भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही हैं। कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि अगर भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता होता है, तो उसमें इस “अस्वीकार्य गैर-शुल्कीय बाधा” को दूर करने के लिए ठोस प्रावधान किए जाने चाहिए।
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