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वंदे मातरम् गायन को लेकर विवाद: उज्जैन में इमाम की अपील से बढ़ी बहस

February 15, 2026

उज्जैन। स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के गायन (Singing of Vande Mataram) को लेकर देश के कुछ हिस्सों में बहस तेज हो गई है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थानीय इमाम मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी (Syed Nasir Ali Nadvi) के बयान के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।

क्या है मामला

हाल ही में गृह मंत्रालय (भारत) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में सरकारी आयोजनों और शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के सभी छह छंदों के गायन की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। निर्देशों के अनुसार, गीत के दौरान उपस्थित लोगों से सम्मान में खड़े रहने की अपेक्षा की गई है।

इमाम का विरोध और अपील

इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए मुफ्ती सैय्यद नासिर अली नदवी ने कहा कि भारत विविध धर्मों और आस्थाओं वाला देश है, जहां सभी को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता है। उन्होंने तर्क दिया कि इस्लाम एकेश्वरवाद पर आधारित है और किसी भी रूप में “पूजा” की अवधारणा को स्वीकार नहीं करता। इसी आधार पर उन्होंने समुदाय से अपील की कि जहां वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य किया जा रहा है, वहां अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर पुनर्विचार करें।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ऐसे कार्यक्रमों से बचा जाए, जिन्हें किसी विशेष धार्मिक दृष्टिकोण से आपत्तिजनक माना जा सकता है।



  • बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

    इमाम के बयान के बाद विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कई संगठनों का कहना है कि वंदे मातरम् राष्ट्रभावना का प्रतीक है और इसका सम्मान सभी नागरिकों का कर्तव्य है।

    धार्मिक संत अतुलेशनन्द ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों को देश के कानून और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। उनके अनुसार, राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर विवाद पैदा करना उचित नहीं है।

    व्यापक बहस का रूप

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राष्ट्रगीत, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के संतुलन पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मुद्दों पर संवाद और संवेदनशीलता दोनों आवश्यक हैं, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे और सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जा सके।

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