
नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल (Crude Oil) की ऊंची कीमतों के बीच आने वाले समय में बड़ी राहत मिलने की संभावना जताई गई है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि अगले महीने डिलीवरी के लिए निर्धारित डेटेड ब्रेंट (Dated Brent) की भौतिक कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंची हुई है। हालांकि, आने वाले महीनों में तेल की आपूर्ति सुधरने और मांग तथा आपूर्ति के बीच संतुलन (Balance) बदलने से कीमतों (Prices) में नरमी आ सकती है।
गोल्डमैन सैश रिसर्च के ताजा अनुमान के अनुसार, ब्रेंट क्रूड दिसंबर 2026 में 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रह सकता है। यह अनुमान बैंक के पहले के 85 डॉलर प्रति बैरल के पूर्वानुमान से अधिक है। इसके बावजूद, वर्ष 2027 में कच्चे तेल की औसत कीमत घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आने की संभावना जताई गई है। यह गिरावट पश्चिम एशिया में तेल आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं के धीरे-धीरे दूर होने पर निर्भर करेगी।
ग्लोबल कमोडिटी रिसर्च के सह-प्रमुख और तेल अनुसंधान प्रमुख डान स्ट्रुवेन के मुताबिक, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। अब इस व्यवधान से धीरे-धीरे उबरने की संभावना है। यदि तेल का निर्यात सामान्य होता है और बाजार में उपलब्धता बढ़ती है, तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, क्षेत्र में दोबारा तनाव बढ़ने पर कीमतें फिर तेजी से ऊपर जा सकती हैं।
रिपोर्ट में फारस की खाड़ी से तेल निर्यात में हुए सुधार को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। उपलब्ध आकलन के मुताबिक, सितंबर के अंत से निर्यात का स्तर वर्ष 2025 के औसत के आसपास बना हुआ है। इस गणना में प्रतिदिन करीब 40 लाख बैरल ऐसे तेल निर्यात का अनुमान भी शामिल है, जिसकी वास्तविक आवाजाही स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हो पाती। इसमें ऐसे टैंकरों से होने वाली ढुलाई शामिल है, जिनके ट्रांसपोंडर बंद रहने के कारण उनकी गतिविधियों का पता लगाना कठिन होता है।
तेल बाजार में मांग और आपूर्ति के अंतर में कमी भी कीमतों के भविष्य के अनुमान को प्रभावित कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में मांग आपूर्ति से प्रतिदिन 72 लाख बैरल अधिक थी, लेकिन सितंबर तक यह अंतर घटकर केवल तीन लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। फारस की खाड़ी के बाहर बढ़े उत्पादन और कमजोर मांग ने इस अंतर को कम करने में भूमिका निभाई है।
इसी आधार पर अनुमान लगाया गया है कि वैश्विक तेल बाजार 2026 की चौथी तिमाही में अधिशेष की स्थिति में पहुंच सकता है। वर्ष 2027 में भी बाजार में आपूर्ति मांग से अधिक रहने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो अतिरिक्त उपलब्धता कीमतों को नीचे लाने में मदद कर सकती है। इसके अलावा, ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण मांग में आई भारी कमी भी 2027 की चौथी तिमाही तक काफी हद तक दूर होने का अनुमान है।
हालांकि, कीमतों में गिरावट की संभावना के साथ जोखिम भी बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव दोबारा बढ़ने, आपूर्ति प्रभावित होने या कीमतों में फिर तेजी आने से कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रह सकता है। इसलिए 80 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान निश्चित परिणाम नहीं, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों और भविष्य में संभावित आपूर्ति सुधार पर आधारित आकलन है।
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