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ई दिल्ली। भारत और अमेरिका (India &USA )के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील (Defense Deal)ने दोनों देशों के रिश्तों में नई गर्मजोशी ला दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वाशिंगटन भारत(Washington India) को और भी खतरनाक हथियार (Dangerous Weapons)प्रणालियों की आपूर्ति पर विचार कर रहा है, जिससे भारत की रक्षा क्षमता (Military Procurement)और मजबूत होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
राष्ट्रपति ट्रंप के शासनकाल में भारत और अमेरिका के संबंधों में काफी ठंडापन रहा। ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी की और कई अमेरिकी टैरिफ भारत पर लागू कर दिए। इसके चलते दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग पर दबाव बढ़ गया। लेकिन ट्रेड डील के बाद हालात बदलते दिख रहे हैं। अमेरिका ने भारत के ऊपर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है और भारत ने अगले लगभग पांच साल में 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की संभावना जताई है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, हवाई जहाज और उनके पुर्जे, धातुएं और टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग में एशियाई मामलों के सहायक सचिव पॉल कपूर ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों देश लगातार रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अमेरिका और भारत अधिक हथियार प्रणालियों की खरीद पर चर्चा कर रहे हैं। इनसे भारत की रक्षा क्षमता और मजबूत होगी और अमेरिका में रोजगार भी बढ़ेगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई तरह के खतरनाक हथियारों पर विचार किया जा रहा है, जो भारत की सुरक्षा को बढ़ाएंगे।
इस समय भारत ने 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद की मंजूरी दे दी है और अमेरिका के साथ समुद्री निगरानी विमानों समेत अन्य बड़ी हथियार प्रणालियों पर चर्चा चल रही है। हालांकि, इस डील में किसी भी फाइटर जेट या एफ-35 विमानों की खरीद को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है।
भारत और अमेरिका पिछले लगभग दो दशकों से रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत कर रहे हैं। वहीं, भारत ने हमेशा रूस के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखे हैं। स्वतंत्रता के बाद से रूस भारत का भरोसेमंद साझेदार रहा है। अमेरिका कई बार भारत को अपने खेमे में लाने का प्रयास कर चुका है, खासकर पांचवीं पीढ़ी के विमानों की खरीद के मामले में। ट्रंप प्रशासन ने इस मामले में दबाव बनाया, लेकिन भारत ने किसी भी निर्णय पर आगे नहीं बढ़ा।
प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। अमेरिका का कहना है कि यह ट्रेड डील और रक्षा सहयोग भारत की स्वायत्तता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए है। दोनों देशों ने इस डील को आर्थिक और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का अवसर बताया है।
इस समझौते के बाद साफ हो गया है कि भारत- अमेरिका रिश्तों में फिर से नया भरोसा पैदा हुआ है। यह न केवल रक्षा क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को मजबूत करेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगा। ट्रेड डील और हथियारों की आपूर्ति पर चल रही चर्चा दर्शाती है कि अमेरिका भारत को एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार मानता है और दोनों देश आगे भी मिलकर सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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