
नई दिल्ली । दिग्गज संगीतकार (Legendary musician)इलैयाराजा (Ilaiyaraaja) को दिल्ली उच्च न्यायालय(Delhi High Court) से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने म्यूजिक लेबल सारेगामा इंडिया लिमिटेड(Saregama India Limited) के पक्ष में एकतरफा अंतरिम आदेश पारित करते हुए इलैयाराजा को उन गानों और साउंड रिकॉर्डिंग्स(sound recordings) का इस्तेमाल करने या उन्हें किसी तीसरे पक्ष को लाइसेंस देने से रोक दिया है, जिन पर कंपनी ने कॉपीराइट का दावा किया है। यह आदेश एक वाणिज्यिक मुकदमे की सुनवाई के दौरान पारित किया गया।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों और असाइनमेंट समझौतों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला वादी यानी सारेगामा के पक्ष में बनता है। अदालत ने माना कि 1976 से 2001 के बीच फिल्म निर्माताओं के साथ किए गए समझौतों के तहत कई भारतीय भाषाओं की फिल्मों के संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग्स के अधिकार कंपनी को सौंपे गए थे। इन समझौतों के अनुसार कंपनी को इन कृतियों को दोबारा बनाने, लाइसेंस देने और व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने के विशेष, विश्वव्यापी और स्थायी अधिकार प्राप्त हैं।
सारेगामा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि कॉपीराइट कानून के तहत किसी फिल्म के लिए तैयार किए गए संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग का पहला मालिक फिल्म निर्माता होता है, जब तक कि किसी अनुबंध में अन्यथा न कहा गया हो। कंपनी का कहना है कि निर्माताओं ने अपने अधिकार विधिवत असाइनमेंट समझौतों के जरिए सारेगामा को हस्तांतरित कर दिए थे, जिससे कंपनी वैधानिक रूप से इन रिकॉर्डिंग्स की मालिक बन गई।
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि फरवरी 2026 से इलैयाराजा ने संबंधित गानों को तीसरे पक्ष को लाइसेंस देना शुरू कर दिया। कंपनी के अनुसार, इन गानों को अमेजॉन म्यूजिक, आईट्यून्स और जियो सावन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किया गया और उन पर मालिकाना हक का दावा भी किया गया। सारेगामा ने इसे अपने कॉपीराइट का उल्लंघन बताया और कहा कि इससे बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि इन रिकॉर्डिंग्स का लगातार इस्तेमाल जारी रहा तो इससे ऐसा अपूरणीय नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई केवल धनराशि से संभव नहीं होगी। पीठ ने यह भी माना कि सुविधा का संतुलन वादी के पक्ष में है, इसलिए अंतरिम संरक्षण दिया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही अदालत ने प्रतिवादियों को समन जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे 30 दिनों के भीतर अपना लिखित बयान दाखिल करें। अंतरिम रोक से संबंधित आवेदन का जवाब चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। इस फैसले ने संगीत उद्योग में कॉपीराइट और असाइनमेंट समझौतों की वैधता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि अंतिम रूप से इन रिकॉर्डिंग्स के अधिकार किसके पास रहेंगे।
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