
नई दिल्ली । देश में व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली थायरॉइड(thyroid) और एंटीबायोटिक दवाओं(antibiotics) को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की गई है। थायरॉइड के इलाज में दी जाने वाली दवा Carbimazole और संक्रमण के उपचार में उपयोग होने वाली एंटीबायोटिक Doxycycline में नए और संभावित रूप से खतरनाक दुष्प्रभाव(Dangerous side effects) पाए गए हैं। इन दुष्प्रभावों को देखते हुए भारत की दवा नियामक संस्था Central Drugs Standard Control Organization सीडीएससीओ (CDSCO)और Drug Controller General of India डीसीजीआई(DCGI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि इन दवाओं के पैकेट और प्रिस्क्रिप्शन जानकारी में नए साइड इफेक्ट्स को स्पष्ट और प्रमुख चेतावनी के रूप में दर्ज किया जाए।
विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बिमाजोल का उपयोग मुख्य रूप से हाइपरथायरॉइडिज्म यानी बढ़े हुए थायरॉइड हार्मोन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। लेकिन हालिया समीक्षा में पाया गया है कि इस दवा के सेवन से कुछ मरीजों में सफेद रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) की संख्या खतरनाक रूप से कम हो सकती है। इस स्थिति को एग्रानुलोसाइटोसिस कहा जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर देता है। जब शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी हो जाती है, तो मरीज साधारण संक्रमण से भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। वायरस, बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने की क्षमता घटने के कारण संक्रमण तेजी से फैल सकता है और गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए डॉक्टरों को सलाह दी गई है कि वे कार्बिमाजोल लेने वाले मरीजों की नियमित ब्लड जांच कराएं और बुखार, गले में खराश या संक्रमण जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाएं।
वहीं, डॉक्सीसाइक्लिन को लेकर भी चिंताजनक संकेत मिले हैं। यह दवा आमतौर पर बैक्टीरियल संक्रमण, त्वचा रोग, सांस संबंधी संक्रमण और कई अन्य स्थितियों में दी जाती है। लेकिन नई समीक्षा में सामने आया है कि कुछ मामलों में इसके सेवन से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। मरीजों में मूड बदलाव, चिंता, अवसाद या भ्रम जैसे लक्षण देखने को मिले हैं। हालांकि ऐसे मामले दुर्लभ बताए जा रहे हैं, लेकिन नियामक संस्थाओं ने एहतियात के तौर पर इन संभावित जोखिमों को दवा की जानकारी में शामिल करना अनिवार्य कर दिया है।
यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर दवाओं के दुष्प्रभावों की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है। सीडीएससीओ और डीसीजीआई ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और दवा कंपनियों को पारदर्शिता बरतनी होगी। अब इन दवाओं के पैकेट पर सख्त सुरक्षा चेतावनी छापना अनिवार्य होगा, ताकि मरीज और डॉक्टर दोनों संभावित जोखिमों से पूरी तरह अवगत रहें।
विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें, लेकिन यदि कोई असामान्य लक्षण दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। जागरूकता और सतर्कता ही इन दुष्प्रभावों से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
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