
नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था (Economy) के मोर्चे पर अच्छी खबर है। भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की मजबूती का संकेत देते हुए चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार के कर संग्रह (Tax Collection) में शानदार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। चालू वित्त वर्ष में 10 फरवरी तक प्रत्यक्ष कर संग्रह (Direct Tax Collection) 9.4 फीसदी बढ़कर लगभग 19.44 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
आयकर विभाग ने बुधवार को जारी आंकड़ों में बताया कि 10 फरवरी तक प्रत्यक्ष कर संग्रह 9.4 फीसदी बढ़कर करीब 19.44 लाख करोड़ रुपये रहा है। विभाग के मुताबिक इस दौरान शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 14.51 फीसदी बढ़कर 8.90 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, यह बढ़ोतरी कॉरपोरेट कर की बेहतर वसूली और कर रिफंड की धीमी गति का परिणाम है।
वहीं गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह, जिसमें व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) से मिले कर शामिल हैं, 5.91 फीसदी बढ़कर करीब 10.03 लाख करोड़ रुपये रहा। शेयरों एवं अन्य प्रतिभूतियों के लेनदेन पर लगाया जाने वाला प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) का संग्रह 1 अप्रैल, 2025 से 10 फरवरी, 2026 के दौरान 50,279 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले की समान अवधि के लगभग समान है।
मंत्रालय के मुताबिक इस अवधि में कर रिफंड जारी करने में 18.82 फीसदी की गिरावट आई और यह घटकर 3.34 लाख करोड़ रुपये रह गया। रिफंड में कमी से शुद्ध कर संग्रह की वृद्धि दर को सहारा मिला। आंकड़ों के मुताबिक देश का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 4.09 प्रतिशत बढ़कर 22.78 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें 10.88 लाख करोड़ रुपये का सकल कॉरपोरेट कर और 11.39 लाख करोड़ रुपये का सकल गैर-कॉरपोरेट कर शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान (आरई) में कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 24.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया है।
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