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कर्नाटक में नेतृत्व बदलाव की चर्चाओं पर विराम डीके शिवकुमार बोले सभी विधायक मेरे साथ कोई संकट नहीं

February 11, 2026

नई दिल्ली। कर्नाटक(Karnataka) की सियासत एक बार फिर मुख्यमंत्री पद(Chief Minister’s post) को लेकर चर्चाओं से गरमा गई है। सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी(ruling Congress party) के भीतर नेतृत्व परिवर्तन(leadership change within) की अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (Deputy Chief Minister DK Shivakumar)ने बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि विधानसभा में कांग्रेस के सभी 136 विधायक(all 136 MLAs) उनके साथ हैं और उन्हें पूरा समर्थन प्राप्त है।

दिल्ली में पार्टी की अहम बैठकों में शामिल होने पहुंचे शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत में उन दावों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि उनके समर्थन में केवल 80 विधायक हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा पूरी तरह गलत है और कांग्रेस विधायक दल एकजुट है। शिवकुमार ने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सहित सभी विधायक उनके साथ हैं और पार्टी में किसी तरह की फूट नहीं है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पिछले कुछ महीनों से नवंबर क्रांति जैसी अफवाहें और संभावित कैबिनेट विस्तार की बातें सामने आती रही हैं। विपक्षी भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार में कथित अंदरूनी खींचतान को मुद्दा बना रही है और इसे अस्थिरता का संकेत बता रही है।

शिवकुमार ने इससे पहले भी कहा था कि राज्य सरकार के नेतृत्व को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं है और सिद्धारमैया के साथ उनका समझौता पार्टी हाईकमान को पहले ही बताया जा चुका है। दिल्ली दौरे के दौरान वे असम विधानसभा चुनावों की समीक्षा बैठक में भी शामिल हुए लेकिन कर्नाटक की सियासी स्थिति पर उनका बयान ही सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।

विधानसभा के आंकड़ों पर नजर डालें तो कांग्रेस के पास कुल 136 विधायक हैं जो बहुमत के लिए पर्याप्त हैं। ऐसे में शिवकुमार का यह दावा कि सभी विधायक उनके समर्थन में हैं उनके राजनीतिक कद और प्रभाव को दर्शाता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि फिलहाल सिद्धारमैया ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे और किसी बदलाव की मांग नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवकुमार का यह बयान पार्टी हाईकमान को एकता का संदेश देने के साथ साथ अपनी ताकत दिखाने की रणनीति भी है। दिल्ली में लगातार हो रही बैठकों और बयानबाजी से यह संकेत जरूर मिलता है कि कांग्रेस के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर हलचल बनी हुई है।


  • फिलहाल सिद्धारमैया सरकार का कार्यकाल जारी है और पार्टी सार्वजनिक तौर पर एकजुटता का दावा कर रही है। लेकिन शिवकुमार की सक्रियता और समर्थन का खुला दावा यह संकेत देता है कि भविष्य में नेतृत्व को लेकर चर्चा फिर जोर पकड़ सकती है। कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि आंतरिक मतभेदों को नियंत्रित रखते हुए शासन और विकास के मुद्दों पर फोकस बनाए रखा जाए ताकि विपक्ष को हमला करने का मौका न मिले।

     

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