
कोरबा: मध्य भारत के कोरबा जिले में दुनिया के सबसे लंबे जहरीले सांप, किंग कोबरा का रहस्य उजागर होने वाला है. वन विभाग ने किंग कोबरा के डीएनए अध्ययन का बीड़ा उठाया है. इस अध्ययन से यह पता चलेगा कि कोरबा में पाए जाने वाले किंग कोबरा दुनिया की चार ज्ञात प्रजातियों में से कौन सी प्रजाति है या फिर यह एकदम नई प्रजाति है. अगर ऐसा होता है तो यह न केवल कोरबा बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी खोज होगी.
विश्व स्तर पर हुए हालिया अध्ययनों से पता चला है कि किंग कोबरा की एक नहीं बल्कि चार अलग-अलग प्रजातियां हैं. लेकिन इन अध्ययनों में कोरबा में पाए जाने वाले किंग कोबरा का कोई जिक्र नहीं था. कोरबा में किंग कोबरा की एक बड़ी आबादी है और यह इलाका इन सांपों के लिए बेहद अनुकूल है.
डीएनए अध्ययन के माध्यम से वैज्ञानिक यह पता लगाएंगे कि कोरबा के किंग कोबरा की जेनेटिक संरचना क्या है. इससे यह पता चल सकेगा कि यह सांप किस प्रजाति से संबंधित है और क्या यह एक नई प्रजाति है. इस अध्ययन के परिणाम से किंग कोबरा के संरक्षण और प्रबंधन के लिए बेहतर नीतियां बनाई जा सकेगी.
किंग कोबरा एक अपेक्स प्रीडेटर है, यानी यह खाद्य श्रृंखला में सबसे ऊपर होता है. यह अन्य सांपों को भी अपना शिकार बनाता है. इसलिए किंग कोबरा का पर्यावरण में मौजूद रहना बेहद जरूरी है. यह हमारे पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित रखने में मदद करता है.
कोरबा में किंग कोबरा की एक बड़ी आबादी होने के बावजूद, आसपास के इलाकों में ये सांप बहुत कम पाए जाते हैं. इससे यह पता चलता है कि कोरबा में पाए जाने वाले किंग कोबरा की कुछ खास विशेषताएं हो सकती हैं. डीएनए अध्ययन से इन विशेषताओं के बारे में पता चल सकेगा. वन विभाग ने क्षेत्र के उन इलाकों की पहचान कर ली है जहां किंग कोबरा पाए जाते हैं. विभाग ने लोगों को भी जागरूक किया है कि किंग कोबरा के अंडों को न तोड़ें और अगर ये सांप दिखाई दें तो उन्हें परेशान न करें. जल्द ही डीएनए अध्ययन शुरू किया जाएगा और इसके परिणामों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है.
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