
डेस्क: महाशिवरात्रि (Maha Shivaratri) का पावन पर्व भक्ति और संयम का दिन है. साल 2026 में फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे होगा. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा. इस विशेष दिन पर महादेव (Mahadev) की पूजा करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. अनजाने में की गई गलतियां आपकी पूजा के फल को कम कर सकती हैं. आइए जानते हैं कि इस दिन हमें किन बातों से बचना चाहिए ताकि शिवदेव की कृपा बनी रहे.
महादेव की पूजा में कुछ खास चीजों का प्रयोग वर्जित माना गया है. शिवलिंग (Shivling) पर कभी भी सिंदूर या कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि महादेव वैरागी हैं और ये चीजें सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं. इसी तरह, शिवदेव की पूजा में शंख का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए और न ही शंख से जल अर्पित करना चाहिए. तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना जाता है. पूजा के दौरान इन नियमों का पालन करने से आपकी श्रद्धा का पूर्ण फल मिलने की संभावना रहती है. गलत सामग्री का चुनाव पूजा में बाधा उत्पन्न कर सकता है.
शिवलिंग का अभिषेक करते समय तांबे के लोटे का प्रयोग करना सबसे उत्तम माना जाता है. हालांकि, यह ध्यान रहे कि तांबे के पात्र में दूध डालकर अभिषेक नहीं करना चाहिए. दूध के अभिषेक के लिए स्टील या चांदी के बर्तन का प्रयोग करना ही सही विधि है. अभिषेक करते समय जल की धारा बहुत धीरे और निरंतर होनी चाहिए. साथ ही, शिवलिंग पर चढ़ाए गए प्रसाद को स्वयं ग्रहण नहीं करना चाहिए, इसे दूसरों में बांट देना ही उचित रहता है. इन छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखने से पूजा विधिपूर्वक संपन्न होती है.
महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले जातकों को तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहना चाहिए. इस दिन लहसुन, प्याज या भारी भोजन का सेवन न करें और केवल सात्विक फलाहार ही लें. व्रत के दौरान मन को शांत रखें और किसी के प्रति क्रोध या अपशब्दों का प्रयोग न करें. किसी का अपमान करना या मन में बुरे विचार लाना आपके व्रत की पवित्रता को कम कर सकता है. महादेव केवल शुद्ध मन और प्रेम के भूखे हैं. संयम और अनुशासन के साथ किया गया व्रत ही आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचालन कर सकता है.
शिवलिंग की पूजा करते समय ध्यान रहे कि कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है. जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है (जलाधारी), उसे कभी लांघना नहीं चाहिए. हमेशा आधी परिक्रमा करके ही वापस लौट आना चाहिए. इसके अलावा, महादेव को टूटे हुए अक्षत यानी खंडित चावल कभी अर्पित न करें. पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें और बीच में उठकर कहीं न जाएं. इन नियमों का श्रद्धापूर्वक पालन करने से महादेव की असीम प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होने की संभावना बढ़ जाती है.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved