वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ग्रीनलैंड (Greenland) पर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को उन्होंने कहा कि यूएस (US) इस आर्कटिक द्वीप (Arctic Island) पर कार्रवाई करेगा, चाहे वह आसान तरीके से हो या कठिन। व्हाइट हाउस में तेल उद्योग के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं किया, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर लेंगे, जिससे US को इन देशों को पड़ोसी के रूप में स्वीकार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, ‘हम ग्रीनलैंड पर कुछ करने जा रहे हैं, चाहे उन्हें पसंद आए या नहीं। हमारे लोग आसान तरीके से डील करना चाहते हैं, लेकिन अगर नहीं हुआ तो हम इसे कठिन तरीके से करेंगे।’
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा को आधार बनाते हुए जोर दिया कि ग्रीनलैंड का मालिकाना हक अमेरिका के पास होना चाहिए, ताकि इसे ठीक से बचाया जा सके। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के ईरान समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि अल्पकालिक डील से काम नहीं चलता, बल्कि स्थायी नियंत्रण जरूरी है। मालूम हो कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का सेमी-ऑटोनॉमस क्षेत्र है और लगभग 57,000 निवासियों का घर है। यह प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, खासकर दुर्लभ खनिजों से। ट्रंप प्रशासन इस द्वीप पर प्रभाव बढ़ाने के लिए कई विकल्प तलाश रहा है, जिसमें ग्रीनलैंडवासियों को प्रति व्यक्ति 10,000 से 1,00,000 डॉलर तक नकद भुगतान करने का प्रस्ताव शामिल है, ताकि वे डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के करीब आएं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य विकल्प कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन है जिसमें अमेरिका वित्तीय सहायता और रक्षा प्रदान करेगा। इसके बदले में सैन्य पहुंच मिलेगी। वैसे अधिकांश ग्रीनलैंड निवासी डेनमार्क से स्वतंत्रता चाहते हैं, लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहते। ट्रंप का यह बयान पिछले सालों की उनकी इच्छा को दोहराता है, जब उन्होंने ग्रीनलैंड खरीदने की बात कही थी। ट्रंप के इन बयानों पर डेनमार्क और यूरोपीय देशों में भारी नाराजगी है।
डेनमार्क भी हमले के लिए तैयार
डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड पर कोई हमला हुआ तो उसके सैनिक पहले गोली चलाएंगे और बाद में सवाल पूछेंगे। यूरोपीय नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि ग्रीनलैंड का भविष्य सिर्फ उसके लोगों और डेनमार्क के हाथ में है। यह विवाद नाटो गठबंधन के लिए भी चुनौती पैदा कर रहा है, क्योंकि डेनमार्क नाटो का सदस्य है। ट्रंप का दावा है कि रूस और चीन आर्कटिक में बढ़ती गतिविधियां चला रहे हैं। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीनलैंड के पास ऐसी कोई प्रत्यक्ष धमकी नहीं है। यह मामला अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ाने की क्षमता रखता है।
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