
नई दिल्ली । तिब्बत (Tibet) में रात करीब 2.30 बजे भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक भूकंप का केंद्र धऱती के 25 किलोमीटर नीचे था, वहीं भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 मापी गई है। बता दें कि भूकंप का केंद्र जब धरती के ज्यादा नीचे नहीं होता है तो वह ज्यादा खतरनाक होता है। दरअसल उथले भूकंप में की सीस्मिक तरंगें धरती पर कम दूरी तक जाती हैं जिससे की धरती ज्यादा तेज हिलती है। इससे इमारतों को ज्यादा नुकसान होता है।
तिब्बती पठार को भूकंप संभावित क्षेत्रों में रखा गया है। यहां टेक्टोनिक प्लेटों में टकराव होता रहता है। तिब्बत और नेपाल एक बड़ी जियोलॉजिकल फाल्ट लाइन पर हैं और इसलिए यहां अकसर भूकंप आया करते हैं। यूरेशियल प्लेट से टकराने की वजह से अकसर धरती हिल जाती है। यह पठार पूर्व से पश्चिम की ओर फैला है। टेक्टोनिक प्लेट्स के उठने की वजह से हिमायल की चोटी तक भूकंप के झटके महसूस होते हैं।
दक्षिणी तिब्बत में 1970 के दशक के आखिर में और 1980 के दशक की शुरुआत में सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल करके सात उत्तर-दक्षिण दिशा में फैली दरारें और नॉर्मल फॉल्ट की पहचान की गई थी। माना जाता है कि ये फाल्ट लाइन्स 8 लाख साल पहले बनी थीं।
तिब्बत में स्ट्राइक स्लिप फाल्स्ट्स पर 8 तीव्रता तक का भूकंप आ चुका है। वहीं नॉर्मल फाइल्ट लाइन पर 4 से 7 तीव्रता तक के भूंकप आते हैं। बता दें कि अभी दो दिन पहले ही म्यांमार में 6.0 तीव्रता का भूकंप आया था। इस भूकंप के झटके कोलकाता तक महसूस किए गए थे। इसका केंद्र येनांगयौंग से लगभग 95 किलोमीटर पश्चिम में था।
आखिर भूकंप क्यों आते हैं?
धऱती के नीचे टेक्टॉनिक प्लेटों में हलचल की वजह से ही भूकंप आते हैं। धऱती की बाहरी परत कई भागों में बंटी है जो कि धीरे-धीरे घूमती है। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं तो नीचे की ऊर्जा रिलीज होती है। भारत और म्यांमार के बीच इंडियन प्लेट और यूरेशियनल प्लेट में टकराव होता है और इस वजह से भूकंप आता है।
चीन में भी भूकंप
रयूक्यू द्वीप समूह में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय समयानुसार शाम को 6 बजकर 20 मिनट बजे 5.8 तीव्रता का भूकंप आया। यह जानकारी जीएफजेड जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज ने दी।भूकंप का केंद्र 10 किमी की गहराई में था और शुरुआत में इसे 29.07 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 130.41 डिग्री पूर्वी देशांतर पर निर्धारित किया गया।

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