इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) और कर्ज की दशकों पुरानी कहानी की हकीकत अब खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर ली है। उन्होंने माना कि वह और पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर विदेशी देशों के सामने कर्ज के लिए मजबूरी में हाथ फैलाने को मजबूर रहे हैं।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन इसके पीछे भारी कर्ज का बोझ है। उन्होंने कहा, “मैं उन सभी देशों का आभारी हूं जिन्होंने पाकिस्तान की मदद की, लेकिन कर्ज के साथ जिम्मेदारियां भी आती हैं। मैं और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर चुपचाप उन देशों में गए, उन्हें पाकिस्तान की स्थिति और IMF कार्यक्रम के बारे में बताया और फिर अरबों डॉलर के कर्ज की मांग की। कर्ज मांगने वाले का सिर हमेशा झुका रहता है।”
शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया कि कर्ज लेने के बदले कई बार मदद करने वाले देशों की शर्तें भी माननी पड़ती हैं।
“अपनी इज्जत बनाए रखते हुए कर्ज लेना आसान नहीं होता, कई बार उनकी मांगों को स्वीकार करना पड़ता है,” उन्होंने कहा।
किन देशों ने की पाकिस्तान की मदद
प्रधानमंत्री ने बताया कि सबसे मुश्किल समय में चीन ने पाकिस्तान का सबसे अधिक साथ दिया। इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने भी आर्थिक सहयोग किया।
IMF को ‘इज्जत की कसम’
शहबाज शरीफ ने IMF प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीएवा से हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि पहले के कार्यक्रमों में हुई गलतियों के चलते IMF नया पैकेज देने को तैयार नहीं था।
“मैंने उनसे कहा कि मैं आपको इज्जत की कसम देता हूं कि इस बार समझौते का अक्षरशः पालन किया जाएगा,” शहबाज शरीफ ने कहा।
इसके बाद IMF ने शर्तों के साथ सहयोग दिया, जिससे पाकिस्तान डिफॉल्ट होने से बच सका।
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