
इंदौर। कहीं पेड़ (Tree) गिरे तो कहीं ट्रांसफार्मर (Transformer) तबाह हो गए। विद्युतकर्मियों (Electricians) के साथ निगम का दल रातभर बिजली लाइनों (Power lines) पर झूलते पेड़ों को हटाकर विद्युत प्रवाह (electric current) शुरू कराने के लिए जद्दोजहद करता रहा और आलम यह रहा कि शहर के कई इलाकों में देर रात तक अंधेरा रहा तो कहीं सुबह बिजली आई।
40 टंकियां पूरी तरह खाली, एक दर्जन अधूरी भर पाईं
तेज हवा, आंधी के चलते जलूद में भी फाल्ट होने से नर्मदा का पानी सप्लाय नहीं हो सका, जिसके चलते आज सुबह शहर के प्रमुख क्षेत्रों की 40 टंकियां पूरी तरह खाली रहीं और एक दर्जन टंकियां अधूरी भर पाईं। कई क्षेत्रों में लोग पानी के लिए गर्मी के दौरान परेशान होते रहे। आए दिन जलूद में हो रही खराबी के चलते शहर में पानी सप्लाय प्रभावित होता है और लोग पानी के लिए परेशान होते हैं। दो दिन पहले भी ऐसी ही स्थिति बनी थी। अब कल फिर जलूद में हुए फाल्ट के बाद आज सुबह 40 टंकियां पूरी तरह खाली रहीं और एक दर्जन टंकियां अधूरी भर पाईं। नर्मदा प्रोजेक्ट के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव के मुताबिक आज दोपहर तक सुधार कार्य पूरा होने की संभावना है।
मनोरमागंज जोन में सबसे खराब हालत
कल वैसे तो पूरे शहर में ही स्थिति बिगड़ गई और इस स्थिति को संभालने में मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पूरी तरह से नाकाम रही। इसमें भी सबसे ज्यादा खराब हालत तो मनोरमागंज जोन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में रही। तिलक नगर के कार्यालय को आधी रात को लोगों ने घेर लिया तो वहां सुरक्षा के लिए पुलिस बल लगाना पड़ा। आज सुबह तक भी इस क्षेत्र में बिजली की सप्लाय शुरू नहीं हो पाई। गीता भवन से लगा हुआ सेवा सरदार नगर और उसके आसपास का क्षेत्र भी कल शाम से बिजली के आने का इंतजार कर रहा है। अधिकारियों के निवास वाला रेसीडेंसी एरिया कल दोपहर में बिजली जाने के बाद रात को 1.30 बजे बिजली व्यवस्था सुचारू हुई।
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