
अजमेर: राजस्थान में बिजली निगम (Electricity Corporation) के एक जनियर क्लर्क (Clerk) को रिश्वत (Bribe) लेने का दोषी पाया गया है. एसबी कोर्ट ने दोषी क्लर्क को एक साल कैद और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है. ये मामला साल 2009 का यानी 16 साल पुराना है. दोषी जुनियर क्लर्क का नाम भरतलाल जैन (Bharatlal Jain) है. कोर्ट ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, आसपुर (डूंगरपुर) के तत्कालीन जुनियर क्लर्क भरतलाल जैन को बिजली कनेक्शन देने के बदले 400 रुपए की रिश्वत लेने के मामले में दोषी पाया और ये सजा सुनाई है.
चार मार्च, 2009 को डूंगरपुर के रहने वाले लोकेश मेहता ने बांसवाड़ा एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में लोकेश मेहता ने एसीबी को बताया था कि आसपुर में बस स्टैंड के पास मेरा केबिन है. केबिन के लिए मुझे बिजली का कनेक्शन चाहिए था, इसलिए मैंने कनेक्शन के लिए बिजली निगम में आवेदन दिया. 10 फरवरी साल 2009 को मांगे गए 2910 रुपये मैंने बिजली निगम में जमा करा दिए.
लोकेश मेहता ने अपनी शिकायत में बताया कि मांगी गई राशि जमा कराने के बाद बिजली निगम के जुनियर क्लर्क भरतलाल जैन ने कनेक्शन करने के बदले एक हजार रुपये की रिश्वत की मांग की. हालांकि भरतलाल जैन पांच सौ रुपये लेकर बिजली कनेक्शन करने के लिए राजी हो गया. शिकायत के बाद एसीबी ने पूरे मामले की जांच की. इतना ही नहीं एसीबी टीम ने 5 मार्च साल 2009 को भरतलाल जैन को 400 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया.
इसके बाद एसीबी भरतलाल जैन के खिलाफ कोर्ट में 24 नवंबर साल 2011 को चार्जशीट दाखिल की. कोर्ट में आरोपी जुनियर क्लर्क के खिलाफ 15 गवाह और 25 दस्तावेज पेश किए. एसीबी-1 कोर्ट के जज मनीष अग्रवाल ने भरतलाल जैन को दोषी पाया और उसको उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एक साल की कैद और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी.

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