वाशिंगटन। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग से जहां हमारी ज़िंदगी आसान हो रही है, वहीं इसके पर्यावरणीय प्रभावों ने भी चिंता बढ़ा दी है। एआई (AI) की बढ़ती पानी और बिजली की खपत के कारण अब यह भविष्य में संक्रमण और संकट का कारण बन सकता है। एआई से जुड़े डेटा सेंटर्स का विशाल ऊर्जा उपयोग और जल संकट, मस्क के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। इस समस्या के समाधान के लिए, एलन मस्क ने एक चौंकाने वाला और नया विचार पेश किया है।
मस्क का समाधान: अंतरिक्ष में डेटा सेंटर्स
एलन मस्क का मानना है कि एआई और चैटबॉट्स के बढ़ते उपयोग के कारण भविष्य में पृथ्वी पर बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ जाएगा, जिससे ब्लैकआउट का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस दबाव से बचने के लिए, मस्क ने अंतरिक्ष में डेटा सेंटर्स स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। उनका विचार है कि सोलर पावर से इन सेंटर्स को हमेशा बिजली मिल सकती है, क्योंकि अंतरिक्ष में 24 घंटे सूरज की रोशनी होती है। इससे पानी और बिजली की खपत को कम किया जा सकता है, जो कि पृथ्वी पर बढ़ता जा रहा संकट है।
मस्क ने SpaceX और अपनी एआई कंपनी का विलय किया है, और उनका उद्देश्य अंतरिक्ष में लगभग 10 लाख सैटेलाइट्स का एक नेटवर्क स्थापित करना है, जिससे डेटा प्रोसेसिंग को पृथ्वी से बाहर ले जाया जा सके।
इसके अलावा, अंतरिक्ष में पहले ही बहुत कचरा हो चुका है, और मस्क का 10 लाख सैटेलाइट्स भेजने का विचार आपस में टकराव का खतरा पैदा कर सकता है, जिससे ग्लोबल कम्युनिकेशन सिस्टम पर असर पड़ सकता है।
मस्क के पास है यह बड़ा फायदा
हालांकि, इस क्षेत्र में गूगल और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन जैसी कंपनियां भी हैं, लेकिन मस्क के पास SpaceX के जरिए एक बड़ा फायदा है। मस्क खुद अपने रॉकेट्स के जरिए सामान भेजते हैं, और वे कम लागत में यह काम करते हैं। जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को इसके लिए 10 गुना ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है।
निष्कर्ष
एलन मस्क का यह अंतरिक्ष आधारित AI डेटा सेंटर्स का विचार भले ही सुनने में क्रांतिकारी लगे, लेकिन इसके व्यावहारिक पहलू और भविष्य में उत्पन्न होने वाली चुनौतियां काफी बड़ी हो सकती हैं। फिर भी, मस्क की नवाचार और प्रौद्योगिकी में नेतृत्व से यह समाधान संभव हो सकता है। क्या यह स्पेस में AI का भविष्य बना पाएगा? समय ही बताएगा!
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved