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मल्टीप्लेक्स के दौर में भी जिंदा हैं ये विरासत भारत के सबसे आइकॉनिक सिंगल स्क्रीन थिएटर

February 09, 2026

नई दिल्ली । भारत में सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं बल्कि एक भावनात्मक अनुभव (emotional experience)रहा है। एक दौर था जब फिल्म देखना किसी त्योहार से कम नहीं होता था और सिंगल स्क्रीन थिएटर(single-screen theaters) इस अनुभव की जान हुआ करते थे। समय के साथ मल्टीप्लेक्स संस्कृति (multiplex culture)ने तेजी से जगह बनाई और सिंगल स्क्रीन थिएटर कम होते चले गए। हाल ही में आमिर खान और जावेद अख्तर (Aamir Khan and Javed Akhtar)जैसे दिग्गजों ने देश में घटती थिएटर संख्या (number of theaters)पर चिंता जताई। इसके बावजूद आज भी भारत में कुछ ऐसे आइकॉनिक सिंगल स्क्रीन थिएटर मौजूद हैं जो अपनी शान और पहचान को अब तक संभाले हुए हैं।
इस सूची में सबसे पहला नाम राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित राज मंदिर का आता है। साल 1976 में शुरू हुआ यह थिएटर किसी शाही महल से कम नहीं लगता। इसका भव्य आर्किटेक्चर विशाल झूमर और दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी इसे बेहद खास बनाती है। राज मंदिर को एशिया का गौरव भी कहा जाता है और आज भी यहां फिल्म देखना एक शाही अनुभव माना जाता है।

मुंबई का मराठा मंदिर भी भारतीय सिनेमा इतिहास का अहम हिस्सा है। यह थिएटर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है क्योंकि यहां शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे पिछले तीन दशकों से लगातार दिखाई जा रही है। आज भी यहां दोपहर के शो की टिकटें बेहद किफायती हैं और दर्शकों की भीड़ बनी रहती है।

दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित रीगल सिनेमा राजधानी के सबसे पुराने थिएटरों में से एक है। साल 1932 में बने इस सिनेमा हॉल में राज कपूर अपनी कई फिल्मों का प्रीमियर किया करते थे। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सहित कई बड़े नेता यहां फिल्में देखने आते थे। यह दिल्ली का पहला सिंगल स्क्रीन थिएटर माना जाता है।

दिल्ली गेट के पास स्थित डिलाइट सिनेमा अपने विंटेज लुक और शानदार एम्बियंस के लिए जाना जाता है। इसका इंटीरियर और आर्टवर्क आज भी पुराने दौर की याद दिलाता है। यहां का साउंड सिस्टम और बैठने की व्यवस्था आज भी कई आधुनिक थिएटरों को टक्कर देती है।

मुंबई का लिबर्टी सिनेमा भी भारतीय सिनेमा का एक गौरवशाली अध्याय है। इसे भारत की आजादी वाले साल 1947 में तैयार किया गया था। इसी वजह से इसका नाम लिबर्टी रखा गया। मुगल ए आजम जैसी ऐतिहासिक फिल्म यहां लंबे समय तक चली थी।

कोलकाता का मेट्रो सिनेमा 1935 में मेट्रो गोल्डविन मेयर द्वारा बनवाया गया था। इसकी भव्य सीढ़ियां और पुराने जमाने का फर्नीचर दर्शकों को बीते जमाने में ले जाता है। यह कोलकाता के सबसे प्रतिष्ठित सिनेमाघरों में गिना जाता है।


  • बेंगलुरु के फ्रेजर टाउन में स्थित एवरेस्ट टॉकीज करीब 80 साल से भी ज्यादा पुराना है। सस्ती टिकटें और पारंपरिक माहौल इसे आज भी आम दर्शकों की पसंद बनाए हुए हैं।

    ये सिंगल स्क्रीन थिएटर सिर्फ इमारतें नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा की जीवित विरासत हैं जो आज भी अपने पुराने जादू के साथ दर्शकों का स्वागत कर रही हैं।

     

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