
नई दिल्ली. विदेश मंत्री (External Affairs Minister) एस जयशंकर ( Jaishankar) शनिवार को आईआईएम (IIM) रायपुर के दीक्षांत समारोह (Convocation Ceremony) में शामिल हुए. यहां छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछला एक दशक पूरी दुनिया के लिए भारी उथल-पुथल वाला रहा है. कोरोना महामारी, मिडिल ईस्ट जैसे वैश्विक युद्ध और तेजी से बदलते मौसम ने हर देश की परीक्षा ली है. जयशंकर के मुताबिक, इन तमाम बाहरी झटकों के बावजूद भारत एक मजबूत वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है और आज दुनिया की कूटनीति में अपनी खास जगह बना चुका है.
उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे इन बड़ी चुनौतियों ने हमारे जीवन को पूरी तरह बदल दिया. महामारी ने जहां काम करने के तौर-तरीकों को नया रूप दिया, वहीं चल रहे अंतरराष्ट्रीय संघर्षों ने दूर-दराज के समाजों पर भी गहरा असर डाला है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, जयशंकर का मानना है कि इतनी बड़ी रुकावटों के बाद भी भारत का दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना कोई छोटी बात नहीं है. उन्होंने इस सफलता का श्रेय देश के निर्णायक नेतृत्व और समावेशी विकास को दिया, जिसने हर वर्ग को साथ लेकर चलने का काम किया है.
डिजिटल क्रांति और आत्मनिर्भरता ही बना सुरक्षा कवच
भारत की इस मजबूती के पीछे जयशंकर ने दो बड़े कारण बताए. पहली डिजिटल क्रांति और दूसरी आत्मनिर्भरता. उन्होंने कहा कि हमने सिर्फ तकनीक को अपनाया ही नहीं, बल्कि इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लिया है. आज भारत की डिजिटल ताकत को देखकर कई विकसित देश भी हैरान हैं. विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि मौजूदा समय में अपनी राष्ट्रीय क्षमताएं बढ़ाना ही किसी भी बड़े जोखिम से बचने का सबसे कारगर तरीका है. आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य केवल एक विजन नहीं, बल्कि आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत है.
भोजन, स्वास्थ्य और ऊर्जा सुरक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने आगाह किया कि आज की दुनिया में तकनीक और संसाधनों को एक-दूसरे के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में हमें उन क्षेत्रों में खुद को ताकतवर बनाना होगा जो हमारे बस में हैं. जहां हम सीधे कुछ नहीं कर सकते, वहां भरोसेमंद साझीदारों के साथ मिलकर काम करना होगा. जयशंकर ने साफ किया कि सरकार की विदेश नीति अब भारतीय उत्पादकों के लिए नए बाजार तलाशने और संकट के समय अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ज्यादा केंद्रित है.
अंत में, उन्होंने ग्रेजुएट हो रहे छात्रों को भविष्य की जिम्मेदारी सौंपी. जयशंकर ने कहा कि यह पीढ़ी बेहद भाग्यशाली है क्योंकि यह विकसित भारत के सपने को हकीकत में बदलते हुए देखेगी. आज का भारत विकास की राह पर लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है और ब्रांड इंडिया को दुनिया भर में एक भरोसेमंद पार्टनर के रूप में पहचाना जा रहा है.
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