
वाराणसी: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी (Varanasi) में कचहरी परिसर (Court Premises) में दरोगा मिथिलेश कुमार प्रजापति (Inspector Mithilesh Kumar Prajapati) पर हुए हमले का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. देर रात कैंट थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई. घायल दरोगा मिथिलेश कुमार की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है. दस वकीलों समेत करीब साठ अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है.
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आपराधिक प्रवृत्ति के वकीलों ने गुट बनाकर षड्यंत्र रचा और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करते हुए खतरनाक हथियारों से लैस होकर दरोगा पर जानलेवा हमला कर दिया. आरोपियों ने मिथिलेश कुमार को बुरी तरह पीट-पीटकर बेहोश कर दिया और उनके पास से 4200 रुपये भी लूट लिए.
घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि असामाजिक वकीलों की भीड़ दरोगा को घेरकर बेरहमी से पिटाई कर रही है. इस दौरान दरोगा को बचाने पहुंचे कांस्टेबल राणा प्रसाद को भी चोटें आईं. पुलिस ने इस मामले में मोहित मौर्य और अजीत मौर्य को मुख्य आरोपी माना है.
मारपीट की वजह एक पुराने विवाद से जुड़ी बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक, मोहित मौर्य का अपने पट्टीदार प्रेमचंद मौर्य से जमीन का विवाद चल रहा है. इस विवाद में बड़ागांव थाने में तैनात दरोगा मिथिलेश कुमार ने कार्रवाई करते हुए मोहित मौर्य को हिरासत में लिया था और उस पर मारपीट का आरोप भी लगा था. बाद में वकीलों के हस्तक्षेप से मोहित मौर्य को थाने से छोड़ा गया. माना जा रहा है कि कचहरी में हुई मारपीट की घटना उसी विवाद की कड़ी है.
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